SEBI ने म्यूचुअल फंड और NFO से जुड़े नियमों में किया बड़ा बदलाव, आपको भी मिलेगा ये मोटा फायदा

बाजार नियामक सेबी ने म्यूचुअल फंड और NFO से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव किए हैं. ये नियम एक अप्रैल से लागू होने जा रहे हैं. अगर आप भी NFO में पैसा लगाते हैं, तो इन बदलावों से आपको भी फायदा होने वाला है. इस रिपोर्ट में जानें क्या हैं ये बदलाव.?

सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया Image Credit: GettyImages

अगर आप भी म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं. खासतौर पर अगर NFO में निवेश करते हैं, तो बाजार नियामक सेबी ने NFO से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव किए हैं. ये ज्यादातर नियम AMC की सुविधा के लिए हैं. हालांकि, कुछ नियम ऐसे भी हैं, जिनसे निवेशकों को NFO में निवेश के मामले में अपने निवेश पर ज्यादा कंट्रोल करने का मौका मिलेगा.

सेबी ने गुरुवार 27 फरवरी को जारी एक सर्कुलर में कहा है कि NFO ट्रस्टी जुटाए गए फंड को तय समय सीमा के भीतर घोषित किए गए निवेश साधनों में लगाने के लिए जिम्मेदार होंगे. सेबी ने NFO फंड डिप्लोयमेंट के लिए समय सीमा तय करते हुए कहा है कि एसेट मैनेजमेंट कंपनियों के लिए नए फंड ऑफर (एनएफओ) के जरिये निवेशकों से जुटाई गई रकम को यूनिट आवंटन की तारीख से 30 दिनों के भीतर घोषित किए गए साधनों में निवेश करना होगा. फिलहाल, फंड निवेश करने की कोई तय समय सीमा नहीं है.

तय होगी AMC की जिम्मेदारी

इससे फंड जुटाने वाली AMC पर यह जिम्मेदारी तय होगी कि वे उतने ही फंड जुटाएं, जितने तय समय सीमा में उचित साधनों में निवेश किए जा सकें. इससे NFO और म्यूचुलअ फंड को बेतुके दावों के साथ बेचना मुश्किल हो जाएगा. इसके साथ ही सेबी ने एएमसी को म्यूचुअल फंड स्कीम के स्कीम इन्फॉर्मेशन डॉक्यूमेंट (एसआईडी) में बताए गए स्पेसिफिक एसेट अलोकेशन के आधार पर ही रकम जुटाने को कहा है. इसके साथ ही कहा गया है कि फंड जुटाने और यूनिट अलोकेट करने के 30 दिन के भीतर उस फंड का बताए गए एसेट अलोकेशन के हिसाब से निवेश करना होगा. सिर्फ विशेष परिस्थिति में निवेश समिति की मंजूरी के बाद इस समय सीमा को 30 दिन के लिए बढ़ाया जा सकता है.

निवेशकों को क्या फायदा

SEBI के सर्कुलर के मुताबिक AMC अगर NFO से जुटाए फंड को 60 बिजनेस डेज के भीतर बताई गई एसेट अलोकेशन स्कीम के मुताबिक इन्वेस्ट नहीं करती है, तो निवेशकों पर एक्जिट लोड नहीं लगा पाएगी.

सेबी ने क्यों बदले नियम

यह कदम तब उठाया गया जब सेबी ने पाया कि कुछ मामलों में एनएफओ के जरिये जुटाए गए फंड का इन्वेस्टमेंट करने में बेतुकी देरी हुई है. हालांकि, AMC की दलील है कि इस देरी का कारण जमा किए गए फंड का आकार और बाजार में अस्थिरता थी. सेबी ने फंड फ्लो को प्रभावी तरीके से मैनेज करने के लिए यह बदलाव किए हैं.