टूट गई आखिरी दीवार! 20 साल में पहली बार FMCG शेयरों का इतना बुरा हाल… क्या तेल साबुन भी नहीं खरीद रहे लोग?

Nifty FMCG Index: निफ्टी FMCG इंडेक्स 20 फीसदी के करीब टूटा है. FMCG कंपनियों के शेयरों की कहानी कुछ ऐसी रही है कि ये कमजोर बाजार में बेहतर प्रदर्शन करने वाले स्टॉक्स के रूप में उभरे हैं. लेकिन 20 साल के बाद एक बार फिर से कहानी पलटती हुई नजर आ रही है.

कैसे उलट गई एफएमसीजी शेयरों की कहानी. Image Credit: Getty image

Nifty FMCG Index: गिरते शेयर बाजार में हर एक बैरियर धराशायी हो रहे हैं. हर तरफ बिकवाली का दबाव नजर आ रहा है और गिरावट की इस फेहरिस्त में शामिल फास्ट मूविंग कंज्यूमर प्रोडक्टस (FMCG) ने अब चिंताएं बढ़ा दी हैं. 20 साल में पहली बार हिंदुस्तान यूनिलिवर (HUL), आईटीसी (ITC), और एशियन पेंट्स (Asian Paints) जैसी कंपनियों की सुरक्षा ढाल भी इस गिरावट में ढह गए हैं. चूंकि भारत एक बड़ा कंज्यूमर मार्केट है. इसलिए ऐसा माना जाता रहा है कि किसी भी स्थिति में लोग अपनी रोजमर्रा की वस्तुओं की खरीदना जारी रखेंगे. रुपये में गिरावट आए या फिर मार्केट में बिकवाली, FMCG इंडेक्स हर स्थिति में मजूबत डिफेंस की भूमिका निभाएगा. लेकिन यह डिफेंस भी अब ब्रेक हो गया है और FMCG इंडेक्स बुरी तरह टूट गया है.

20 फीसदी टूटा FMCG इंडेक्स

सितंबर 2024 के आखिरी से निफ्टी FMCG इंडेक्स 20 फीसदी के करीब टूटा है. लेकिन निफ्टी 50 में इस अवधि के दौरान 12 फीसदी के आसपास की गिरावट आई है. यानी FMCG इंडेक्स मार्केट की गिरावट से कहीं अधिक टूटा है. 2025 में भी यह सिलसिला बरकरार है और FMCG इंडेक्स इस वर्ष की शुरुआत से 8 फीसदी टूटा है, जबकि निफ्टी 50 में 4.6 फीसदी तक की गिरावट आई है. यानी निफ्टी 50 के मुकाबले निफ्टी FMCG इंडेक्स में दोगुनी गिरावट आई है.

कम हुआ इंडेक्स का वेटेज

Captailine के डेटा के हवाले से बिजनेस स्टैंडर्ड ने लिखा- वित्त वर्ष 2024 (मार्च 2024) के अंत से FMCG इंडेक्स में 3.2 फीसदी की गिरावट आई है, जबकि बेंचमार्क इंडेक्स में 1 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. नतीजतन, पिछले एक साल में निफ्टी 50 में FMCG सेक्टर का वेटेज कम हुआ है. FMCG सेक्टर का वेटेज अब 9.5 फीसदी है, जो मार्च 2011 के बाद से सबसे कम है. उस समय वेटेज 9.2 फीसदी था. इसकी तुलना में देखें, तो मार्च 2014 में FMCG सेक्टर का वेटेज का वेटेज 11.1 फीसदी और साल 2024 के सितंबर में यह 10.9 फीसदी था.

20 साल पहले आई थी कितनी गिरावट?

FMCG कंपनियों के शेयरों की कहानी कुछ ऐसी रही है कि ये कमजोर बाजार में बेहतर प्रदर्शन करने वाले स्टॉक्स के रूप में उभरे हैं. साथ ही गिरावट को कम करते हुए इंडेक्स में रिलेटिव वेटेज में इजाफा किया है. पिछली बार साल 2001 से 2003 के दौरान इस तरह की गिरावट FMCG सेक्टर में देखने को मिली थी, तब FMCG कंपनियों के शेयरों ने बाजार में गिरावट के साथ टूटा था. उस दौरान जब मार्च 2001 और मार्च 2003 के बीच निफ्टी 50 में 15 फीसदी की गिरावट आई थी. वहीं, इंडेक्स में FMCG सेक्टर का वेटेज 24.9 फीसदी से घटकर 19.1 फीसदी पर आ गया था.

गिरते बाजार में मजबूत बने रहने का इतिहास

पिछले 20 साल से अधिक की लंबी अवधि के दौरान FMCG सेक्टर की कंपिनयों के शेयरों ने गिरावट के दौरान एक सुरक्षित ऑपशन के रूप में काम किया है. निवेशकों का मानना था कि इन कंपनियों की डिमांड में गिरावट कभी नहीं आएगी. इसलिए वे अपने पोर्टफोलियो के नुकसान को बैलेंस करने के लिए FMCG सेक्टर की कंपिनयों के शेयरों को चुनते थे.

कोविड महामारी के दौरान शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली थी. लेकिन FMCG सेक्टर के शेयर संभले रहे. वित्त वर्ष 20 के आखिर में FMCG सेक्टर का वेटेज 320 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी के साथ 6 साल के हाई 14.5 फीसदी पर पहुंचा था, जबकि कोविड के चलते निफ्टी 50 में 26 फीसदी तक की गिरावट आई थी. हालांकि, इसके बाद से लगातार वेटेज में गिरावट देखने को मिली है, क्योंकि इसके बाद से मार्केट में बंपर तेजी देखने को मिली है.

एक बार फिर पलटी है कहानी

वित्त वर्ष 21 में 70 फीसदी और वित्त वर्ष 22 में 18.9 फीसदी की तेजी आई है. इस दौरान FMCG सेक्टर का वेटेज घटकर 9.9 फीसदी पर आ गया है. बाजार में तेजी के दौरान बैंकिंग, मेटल, ऑयल एंड गैस, और कैपिटल गुड्स जैसे हाई बीटा सेक्टरों ने जोरदार प्रदर्शन किया है, जिससे FMCG के रिलेटिव वेटेज में गिरावट आई है. हालांकि, वित्त वर्ष 24 में यह सायकिल उलट गई और यह वित्त वर्ष 25 में भी जारी है. FMCG के शेयर बाजार से कहीं अधिक टूटे हैं.

कमजोर तिमाही के आंकड़े

एक फरवरी को पेश हुआ आम बजट के बाद FMCG के शेयरों में तेजी देखने को मिली थी, क्योंकि सरकार ने इनकम टैक्स फ्री का दायरा 7 लाख से बढ़ाकर 12 लाख रुपये कर दिया. इससे उम्मीद जगी कि लोग बचे हुए टैक्स का पैसा खर्च करेंगे और इन कंपनियों के प्रोडक्ट्स की डिमांड बढ़ेगी. लेकिन बजट के बाद की हालिया तेजी के बाद FMCG के शेयर तेजी से टूटे हैं.

लक्ष्मीश्री सिक्योरिटीज के HoR अंशुल जैन कहते हैं कि FMCG कंपनियां डिमांड में गिरावट से तो जूझ ही रही हैं, लेकिन साथ ही क्रूड की बढ़ती कीमतों ने इनकी लागत को बढ़ाया है. इस वजह से भी वित्तीय प्रदर्शन कमजोर नजर आ रहा है और शेयरों में गिरावट देखने को मिल रही है.

हिंदुस्तान यूनिलिवर

सबसे बड़ी FMCG कंपनियों में से एक ने दिसंबर तिमाही के दौरान खपत की मांग में कमी के चलते कमजोर आंकड़े पेश किए. तिमाही के लिए कुल रेवेन्यू में सालाना आधार पर 2 फीसदी की वृद्धि हुई और क्रमिक रूप से 1 फीसदी की गिरावट के साथ यह 15,180 करोड़ रुपये रहा. तिमाही के दौरान नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 19 फीसदी और तिमाही आधार पर 15 फीसदी बढ़कर 2,988 करोड़ रुपये रहा.

टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स

टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स का नेट सेल साल दर साल आधार पर 17 फीसदी बढ़कर 4,445 करोड़ हो गई और प्रॉफिट 5 फीसदी पर स्थिर रहा. हालांकि, कंपनी का नेट प्रॉफिट 5 फीसदी घटकर 299 करोड़ रुपये रह गया, क्योंकि तिमाही के लिए इसके ऑपरेशनल एफिशिएंसी में कमी आई. तिमाही के लिए EBITDA 1 फीसदी की गिरावट के साथ काफी हद तक अपरिवर्तित रहा, जबकि मार्जिन पिछले वर्ष की समान तिमाही से 15 फीसदी से 200 BPS से अधिक घटकर 12.7 फीसदी पर आ गया. यहां भी वॉल्यूम ग्रोथ को लेकर चिंता देखने को मिली, लेकिन कंपनी इसको लेकर आशावादी बनी है.

आईटीसी

आईटीसी ने चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में कंसोलिडेट नेट प्रॉफिट 7.51 फीसदी की (YoY) की गिरावट दर्ज की. कमजोर डिमांड और इनपुट लागत में बढ़ोतरी के बीच मुनाफा 4,935 करोड़ रुपये रहा. कंपनी ने एक साल पहले इसी अवधि में 5,335 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट दर्ज किया था. क्रमिक रूप से कंपनी का नेट प्रॉफिट 1.16 प्रतिशत गिरा, जबकि ब्लूमबर्ग के 5,299 करोड़ रुपये के अनुमान से कम रहा,

एशियन पेंट्स

वित्त वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही के दौरान एशियन पेंट्स के नेट प्रॉफिट में साल-दर-साल आधार पर 23.3 फीसदी की गिरावट आई. कंपनी के रेवेन्यू में भी 6.1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.

  • नेट प्रॉफिट: ₹1,110.48 करोड़, पिछले वर्ष की इसी अवधि में ₹1,448 करोड़ से कम
  • रेवेन्यू: ₹8,521.51 करोड़, पिछले वर्ष की इसी अवधि में ₹9,103 करोड़ से कम

नेस्ले

मैगी, नेस्कैफे, चॉकलेट रेंज और अन्य डेयरी प्रोडक्ट्स जैसे प्रमुख FMCG ब्रांडों की मालिक है नेस्ले ने दिसंबर की तिमाही में टॉप-लाइन में सिंगल डिजिट में ग्रोथ दर्ज की है.ऑपरेशनल के मोर्चे पर, कंपनी ने EBITDA में 2 फीसदी की गिरावट के साथ 1,050 करोड़ रुपये और EBITDA मार्जिन 21.9 फीसदी दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 200 बेसिस प्वाइंट से अधिक की गिरावट है.