22 Feb 2025

Bankatesh kumar

दिमाग को नुकसान पहुंचाती हैं रोजमर्रा की आपकी ये 6 आदतें!

27 Feb 2025

Tejaswita Upadhyay

हमारी दैनिक आदतें हमारे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को गहराई से प्रभावित करती हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ आदतें हमारे मस्तिष्क की कार्यक्षमता को कमजोर कर सकती हैं और दीर्घकालिक समस्याओं को जन्म दे सकती हैं. इन्हें पहचानकर बदलना बेहद जरूरी है.

आदतें तय करती हैं मानसिक स्वास्थ्य

सिर्फ एक आदत में बदलाव लाने से भी मस्तिष्क की क्षमता में सुधार आ सकता है. अच्छी जीवनशैली अपनाकर याददाश्त मजबूत, मानसिक स्पष्टता बेहतर और बढ़ती उम्र में दिमाग को सक्रिय बनाए रखा जा सकता है. यह न केवल अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसी बीमारियों से बचाव करता है बल्कि मानसिक संतुलन भी बनाए रखता है.

स्वस्थ दिमाग के लिए आदत बदलें

लंबे समय तक बैठना मस्तिष्क के उस हिस्से को प्रभावित करता है जो याददाश्त के लिए जिम्मेदार होता है. औसत व्यक्ति 6.5 घंटे तक बैठा रहता है, जिससे मस्तिष्क के कार्य में बाधा आती है. नियमित रूप से ब्रेक लेना, टहलना और हल्का व्यायाम करना इस समस्या को दूर कर सकता है.

बहुत ज्यादा बैठना 

CDC के अनुसार, एक-तिहाई वयस्क पर्याप्त नींद नहीं लेते, जिससे मस्तिष्क की कार्यक्षमता प्रभावित होती है. लगातार 7-8 घंटे की गहरी नींद न लेने से याददाश्त, समस्या समाधान कौशल और निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो जाती है.

नींद की कमी

अत्यधिक अकेलापन भी दिमाग के लिए नुकसानदायक हो सकता है. जब व्यक्ति ज्यादा समय अकेले बिताता है, तो मस्तिष्क को सामाजिक संपर्क से मिलने वाली सकारात्मक ऊर्जा नहीं मिलती. यह अवसाद, चिंता और यहां तक कि डिमेंशिया जैसी समस्याओं को जन्म दे सकता है.

अकेलापन

भले ही आप हेल्दी खा रहे हों, लेकिन जरूरत से ज्यादा खाने से भी मस्तिष्क को नुकसान हो सकता है. शोध बताते हैं कि अत्यधिक भोजन करना मानसिक गिरावट और याददाश्त में कमी से जुड़ा हो सकता है. नियंत्रित आहार लेना और संतुलित डाइट अपनाना आवश्यक है.

जरूरत से ज्यादा खाना

30 मिनट तक तेज आवाज में हेडफोन का इस्तेमाल करने से स्थायी रूप से सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि सुनने की क्षमता कम होने से मस्तिष्क पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे याददाश्त कमजोर हो सकती है और अल्जाइमर का खतरा बढ़ सकता है.

जोर से हेडफोन सुनना

लगातार नकारात्मक सोच और चिंता करने से मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है. शोध बताते हैं कि नकारात्मकता मस्तिष्क में ‘एमिलॉयड’ और ‘ताऊ’ प्रोटीन की मात्रा बढ़ाती है, जो अल्जाइमर जैसी बीमारियों से जुड़ी होती है. सकारात्मक सोच और मेडिटेशन से इस समस्या को दूर किया जा सकता है.

नकारात्मक सोच

मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और सामाजिक संपर्क बेहद जरूरी हैं. साथ ही, तनाव कम करने और सकारात्मक सोच विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए, ताकि मस्तिष्क लंबे समय तक स्वस्थ और सक्रिय बना रहे.

सकारात्मक आदतें अपनाएं