2 April 2025
vivek singh
ATM सुविधा से ग्राहकों को 24x7 कैश निकालने की सहूलियत मिलती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसे ऑपरेट करने में बैंकों को भारी खर्च उठाना पड़ता है? आज हम आपको बताएंगे कि एक ATM को चलाने में कितना खर्च आता है और बैंक इसे कैसे मैनेज करते हैं.
इंडिया मार्ट के मुताबिक, मिनी एटीएम मशीन की लागत 3-4 लाख रुपये होती है. मशीन की फीचर्स और टेक्नोलॉजी के आधार पर इसकी कीमत अलग-अलग हो सकती है. बायोमेट्रिक और कैश रिसाइकलिंग जैसी एडवांस मशीनें और भी महंगी होती हैं.
ATM मशीन की कीमत
बैंक को ATM लगाने के लिए एक सही जगह चाहिए, जहां ग्राहकों की आवाजाही बनी रहे. आमतौर पर इसके लिए 30,000 से 50,000 रुपये प्रति माह किराया देना पड़ता है. मेट्रो शहरों में यह खर्च और ज्यादा हो सकता है.
लोकेशन का किराया
ATM 24 घंटे ऑपरेट होता है, जिससे बिजली की खपत ज्यादा होती है. औसतन हर ATM पर 15,000 से 20,000 रुपये तक बिजली का बिल आता है. बिजली कटौती की स्थिति में जनरेटर और बैटरी बैकअप का खर्च भी इसमें शामिल होता है.
बिजली का बिल
ATM को सुचारू रूप से चलाने के लिए नियमित मेंटेनेंस की जरूरत होती है. इसमें एसी, सर्वर, नेटवर्किंग और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर का खर्च 20,000 से 30,000 रुपये प्रति माह तक हो सकता है.
इन्फ्रास्ट्रक्चर और ऑपरेशन खर्च
ATM में लाखों रुपये का कैश मौजूद होता है, जिससे इसकी सुरक्षा अहम हो जाती है. सुरक्षा गार्ड, सर्विलांस कैमरे और अलार्म सिस्टम के लिए बैंकों को 10,000 से 15,000 रुपये प्रति माह खर्च करना पड़ता है.
सुरक्षा की लागत
एक ATM को ऑपरेट करने में बैंकों को औसतन 85,000 से 1.2 लाख रुपये प्रति माह का खर्च आता है. यह राशि लोकेशन, मशीन के प्रकार और सुरक्षा के हिसाब से बदल सकती है.
कुल मासिक खर्च कितना?
बैंकों के लिए ATM चलाना एक बड़ा खर्च है, इसलिए वे कार्ड ट्रांजैक्शन पर इंटरचेंज फीस, मिनिमम बैलेंस चार्ज और अन्य सर्विस फीस के जरिए इसे रिकवर करते हैं. डिजिटल पेमेंट के बढ़ते चलन से कई बैंक ATM की संख्या कम कर रहे हैं ताकि ऑपरेशन कॉस्ट घटाई जा सके.
बैंक कैसे मैनेज करते हैं यह खर्च?