3 April 2025
vivek singh
भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, 10,152 भारतीय नागरिक विभिन्न विदेशी जेलों में बंद हैं. यह आंकड़ा उन भारतीयों की ओर इशारा करता है, जो कानूनी या अन्य कारणों से विदेशी न्यायिक प्रक्रिया में फंस चुके हैं.
सऊदी अरब में सबसे ज्यादा 2,633 भारतीय कैदी बंद हैं. यह संख्या दिखाती है कि खाड़ी देशों में काम के सिलसिले में गए कई भारतीय कानूनी उलझनों में फंस जाते हैं.
सऊदी अरब में सबसे ज्यादा
संयुक्त अरब अमीरात (2,518 कैदी) और नेपाल (1,317 कैदी) इस लिस्ट में दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं. यूएई में मुख्य रूप से वीजा और काम से जुड़े मामलों में भारतीय जेल जाते हैं, जबकि नेपाल में ज्यादातर गिरफ्तारियां सीमा पार मामलों से संबंधित होती हैं.
UAE और नेपाल भी टॉप लिस्ट में
कतर (611 कैदी) और कुवैत (387 कैदी)जैसे देशों में भारतीयों की गिरफ्तारी के पीछे अक्सर वर्क वीजा, ड्रग ट्रैफिकिंग और अन्य कानूनी उल्लंघन कारण होते हैं.
कतर और कुवैत में भी भारतीय बंदी
मलेशिया (338 कैदी), यूके (288 कैदी), और पाकिस्तान (266 कैदी)में भी कई भारतीय जेलों में बंद हैं. मलेशिया में वीजा उल्लंघन, यूके में क्रिमिनल चार्ज और पाकिस्तान में अवैध प्रवेश प्रमुख कारण हैं.
मलेशिया, यूके, पाकिस्तान
बहरीन (181 कैदी) और चीन (173 कैदी)भी इस लिस्ट में शामिल हैं. चीन में गिरफ्तारियों का कारण ज्यादातर व्यापारिक घोटाले या वीजा उल्लंघन होते हैं, जबकि बहरीन में लेबर विवाद और अन्य कानूनी मुद्दे प्रमुख हैं.
बहरीन और चीन में भी कैदी
जब भी विदेशी जेलों में भारतीयों की बात आती है, तो अमेरिका और श्रीलंका अक्सर चर्चा में नहीं आते. इसका कारण यह है कि अमेरिका में ज्यादातर अवैध प्रवासियों को डिपोर्ट कर दिया जाता है, जबकि श्रीलंका में गिरफ्तार भारतीय ज्यादातर मछुआरे होते हैं.
अमेरिका और श्रीलंका की चर्चा क्यों नहीं होती?
विदेशी जेलों में बंद भारतीय नागरिकों को कांसुलर एक्सेस, कानूनी सहायता और रिहाई की कोशिशें भारतीय दूतावासों द्वारा की जाती हैं. हालांकि, कई मामलों में, स्थानीय कानूनों के कारण भारत सरकार बहुत ज्यादा हस्तक्षेप नहीं कर सकती.
भारत सरकार की क्या भूमिका?