बोलिंजर बैंड क्या है? इससे कैसे कमाएं

3 April 2025

Tejas Chaturvedi

बोलिंजर बैंड एक टेक्निकल एनालिसिस का टूल है, जो बाजार की वोलैटिलिटी को मापने और यह पता लगाने में मदद करता है कि कोई स्टॉक ओवरबॉट है या ओवरसोल्ड है.

बोलिंजर बैंड

मिडल लाइन- यह एक साधारण मूविंग एवरेज (SMA) होती है, जो पिछले कुछ दिनों की औसत कीमत दर्शाती है (आमतौर पर 20 दिनों की). अपर बैंड – यह मध्य रेखा में 2 स्टैंडर्ड डेविएशन जोड़कर बनाई जाती है. लोअर बैंड – यह मध्य रेखा में 2 स्टैंडर्ड डेविएशन घटाकर बनाई जाती है.

बोलिंजर बैंड में तीन लाइन

 जब बैंड के बीच की दूरी ज्यादा होती है, तो बाजार ज्यादा वोलैटिलिटी होता है, और जब दूरी कम होती है, तो वोलैटिलिटी कम होती है.

बाजार की वोलैटिलिटी को समझना

अगर कीमत ऊपरी बैंड के पास है, तो यह बता सकता है कि स्टॉक महंगा हो गया है और गिर सकता है. अगर कीमत निचले बैंड के पास है, तो यह सस्ता हो सकता है और ऊपर जा सकता है.

ओवरबॉट और ओवरसोल्ड 

जब कीमत ऊपरी या निचले बैंड को पार कर जाती है, तो यह संकेत दे सकता है कि बाजार का ट्रेंड बदल सकता है.

ट्रेंड रिवर्सल को पहचानना

कभी-कभी गलत संकेत दे सकता है, खासकर जब बाजार में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव हो.

सीमाएं

जब बैंड आपस में सिमटने लगते हैं, तो यह बताता है कि जल्द ही बाजार में बड़ा मूवमेंट हो सकता है.

बोलिंजर बैंड स्क्वीज़

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