क्या होता है 'चॉपी मार्केट'? इसमें कैसे कमाएं?

2 April 2025

Tejas Chaturvedi

चॉपी मार्केट को रेंज-बाउंड या साइडवेज मार्केट भी कहा जाता है. यह वह स्थिति होती है जब शेयर बाजार में दाम बार-बार ऊपर-नीचे होते रहते हैं, लेकिन कोई साफ़ ट्रेंड नहीं दिखती. यानी न तो शेयर लगातार ऊपर जाते हैं और न ही नीचे गिरते हैं.

चॉपी मार्केट

इस तरह के बाजार में शेयर की कीमतें एक दायरे में घूमती रहती हैं. न तो लगातार बुलिश ट्रेंड दिखती है और न ही बेयरिश ट्रेंड.

चॉपी मार्केट की खासियत

शेयर या कमोडिटी के दाम तेजी से ऊपर-नीचे होते रहते हैं, जिससे यह तय कर पाना मुश्किल हो जाता है कि आगे क्या होगा.

कीमतें बार-बार बदलती हैं

ऐसा तब होता है जब बाजार में खरीदने और बेचने वालों की ताकत बराबर होती है. किसी एक पक्ष का पूरी तरह दबदबा नहीं रहता.

खरीदार और विक्रेताओं में संतुलन

जो ट्रेडर ट्रेंड फॉलो करने वाली रणनीतियों पर काम करते हैं, उनके लिए चॉपी मार्केट में मुनाफा कमाना कठिन हो जाता है. यहां स्पष्ट एंट्री और एग्जिट के संकेत नहीं मिलते.

ट्रेडिंग करना मुश्किल होता है

चॉपी मार्केट में बाजार एक रेंज में घूमता रहता है. इसमें निवेशक लोअर रेंज और अपर रेंज निकालते हैं. लोअर रेंज में शेयर को खरीदकर अपर रेंज में शेयर जाते ही बेच देते हैं.

कैसे करें ट्रेडिंग?

अगर किसी शेयर की कीमत 100 रुपये से 110 रुपये के बीच ही ऊपर-नीचे होती रहे, और कोई बड़ा बदलाव न हो, तो यह चॉपी मार्केट कहलाएगा.

चॉपी मार्केट के उदाहरण

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