स्ट्रॉन्ग और नॉर्मल बीयर में  क्या है अंतर, जबकि यूज होता है एक ही मैटेरियल

   05 April 2025

Satish Vishwakarma

अक्सर हमें लगता है कि स्ट्रॉन्ग बीयर और नॉर्मल बीयर एक जैसे होते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि दोनों एक-दूसरे से काफी अलग होते हैं? साथ ही, इन्हें तैयार करने की प्रक्रिया भी अलग होती है.   

स्ट्रॉन्ग बीयर और नॉर्मल बीयर  

हाल के सालों में भारत में स्ट्रॉन्ग बीयर की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है. इंडस्ट्री रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय बीयर बाजार में लगभग 85 फीसदी हिस्सेदारी स्ट्रॉन्ग बीयर की है. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि आखिर स्ट्रॉन्ग और नॉर्मल बीयर में क्या अंतर होता है.   

क्या है अंतर?  

स्ट्रॉन्ग बीयर की मुख्य पहचान इसका अधिक अल्कोहल बाय वॉल्यूम (ABV) होना है. इसे बनाने में माल्ट की अधिक मात्रा का उपयोग किया जाता है और फर्मेंटेशन की प्रक्रिया को अधिक समय तक चलाया जाता है.   

स्ट्रॉन्ग बीयर की खासियत

जब बीयर में अधिक मात्रा में माल्ट डाला जाता है और फर्मेंटेशन का समय बढ़ाया जाता है, तो इसका स्वाद भी अधिक गहरा हो जाता है. यह स्वाद कैरेमल, टोस्टेड ग्रेन्स या डार्क फ्रूट जैसे फ्लेवर्स से भरपूर हो सकता है.   

स्ट्रॉन्ग बीयर का स्वाद 

दोनों तरह की बीयर में मिलने वाली अल्कोहल की मात्रा अलग-अलग होती है. नॉर्मल बीयर का ABV आमतौर पर 3-5 फीसदी होता है, जबकि स्ट्रॉन्ग बीयर का ABV 6-8 फीसदी या उससे अधिक हो सकता है.   

"Aimai" यानी हल्की और सभ्य बातचीत

बीयर तैयार करने के दौरान इनके फर्मेंटेशन की प्रक्रिया अलग होती है. स्ट्रॉन्ग बीयर का फर्मेंटेशन नॉर्मल बीयर की तुलना में अधिक समय तक चलता है, जिससे इसका फ्लेवर अधिक स्ट्रॉन्ग हो जाता है.  

कैसे बनती हैं?  

स्ट्रॉन्ग बीयर के उत्पादन में माल्ट, यीस्ट और हॉप्स के सही संतुलन का विशेष ध्यान रखा जाता है, ताकि यह केवल अधिक अल्कोहल युक्त न होकर एक प्रीमियम स्वाद अनुभव भी दे. 

बनाने की तकनीक

भारत में युवा वर्ग, विशेष रूप से मिलेनियल्स और Gen Z, अब सिर्फ अल्कोहल के लिए नहीं, बल्कि बेहतर स्वाद और क्वालिटी के लिए भी बीयर पीना पसंद कर रहे हैं. प्रीमियम स्ट्रॉन्ग बीयर की मांग बढ़ रही है. 

भारत में बढ़ती लोकप्रियता