28 March 2025
Satish Vishwakarma
भारत में हर साल गर्मी का प्रकोप बढ़ता जा रहा है. एसी और कूलर महंगे होने के कारण हर किसी के लिए संभव नहीं हैं. इसलिए देश के कई शहरों में लोग एक आसान और सस्ता तरीका अपना रहे हैं, जिससे उनके घर का तापमान लगभग 2 डिग्री सेल्सियस तक कम हो रहा है.
कूल रूफ तकनीक को अपनाकर लोग बिजली की बचत कर रहे हैं और साथ ही पर्यावरण और अपने स्वास्थ्य को भी बेहतर बना रहे हैं. आइए जानते हैं.
पर्यावरण और स्वास्थ्य को फायदा
कूल रूफ का मतलब छत पर सफेद या रिफ्लेक्टिव पेंट लगाना होता है. इससे धूप टकराकर वापस चली जाती है और कमरा अंदर से ठंडा रहता है. यह तकनीक बिना किसी बिजली खर्च के घर को ठंडा रखने में मदद करती है.
क्या है कूल रूफ तकनीक?
काले कपड़े गर्मी सोखते हैं, जबकि सफेद उसे वापस भेज देते हैं. यही आपकी छत भी करती है. सामान्य कंक्रीट की छतें 65°C तक गर्म हो सकती हैं, लेकिन सफेद रंग से पेंट की गई छतें 28°C तक ठंडी रह सकती हैं.
यह कैसे काम करता है?
कूल रूफ से घर के अंदर का तापमान 2-5°C तक कम हो सकता है. बिजली का बिल घटता है, अच्छी नींद आती है और पर्यावरण को भी फायदा होता है.
क्या हैं फायदे?
अहमदाबाद में 400 से अधिक घरों की छतें ठंडी बनाई गई हैं. तेलंगाना में पहली कूल रूफ पॉलिसी लागू हुई है और दिल्ली की गरीब बस्तियों में महिलाओं को यह सुविधा मिल रही है.
भारत में कहां हो रहा है इस्तेमाल?
शहरों में कंक्रीट और धातु बहुत गर्म होते हैं. सफेद छतें इस गर्मी को कम करती हैं और "अर्बन हीट आइलैंड" प्रभाव से राहत देती हैं.
शहरी गर्मी से कैसे बचाता है?
पहले छत साफ करें, फिर दरारें ठीक करें, जरूरत हो तो प्राइमर लगाएं और सफेद पेंट को रोलर या ब्रश से लगाएं. इसे 24 घंटे सूखने दें.
खुद कैसे करें?