पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत की रूस पर तेल निर्भरता और बढ़ गई है. अप्रैल 2026 में भारत के तेल आयात बिल में रूस की हिस्सेदारी 37.7 फीसदी पहुंच गई, जो 11 महीने का उच्च स्तर है. वहीं रूसी तेल पर चुकाया जाने वाला प्रीमियम 425 फीसदी बढ़कर 77.8 डॉलर प्रति टन हो गया, जिससे भारत का कुल आयात बिल भी तेजी से बढ़ा.