ऐसे बनेगा किसानों के लिए सस्ता पॉलीहाउस, फसल की हर समस्या का होगा एक ही जगह समाधान

आज किसानों के सामने कई चुनौतियां हैं, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती बेहतर उत्पादन करना है. बेहतर उत्पादन के लिए पॉलिहाउस को एक अच्छा विकल्प माना जाता है, क्योंकि इसमें दवाओं की आवश्यकता कम होती है और मौसम का प्रभाव भी फसलों पर नहीं पड़ता. लेकिन इसकी सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसकी लागत बहुत अधिक होती है. भारत में छोटे किसानों की संख्या अधिक है, और उनके लिए इसे स्थापित करना संभव नहीं होता. हालांकि, इसका एक विकल्प मौजूद है, जिससे किसान कम खर्च में भी बेहतर आमदनी प्राप्त कर सकते हैं.

लो टनल, वॉक-इन-टनल फार्मिंग Image Credit: money9live.com/AI

Low Tunnel Farming and Walk-in-Tunnel Farming: आमतौर पर पॉलीहाउस के अंदर खेती को फायदेमंद माना जाता है. इसमें फसलों का नुकसान कम होता है और पैदावार अधिक होती है. इसमें नमी और तापमान को नियंत्रित करने की सुविधा होती है, जिससे फसल की उत्पादकता बढ़ती है. भारत में यह तकनीक तेजी से लोकप्रिय हो रही है, और किसान इससे अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. इजराइल में बड़े पैमाने पर पॉलीहाउस में खेती की जाती है, और भारत भी इस तकनीक को अपनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. यदि आप पॉलीहाउस में खेती करते हैं, तो पानी और खाद की आवश्यकता भी कम होती है.

साथ ही, खराब मौसम के बावजूद बेहतर पैदावार संभव होती है. हालांकि, इसकी सबसे बड़ी समस्या इसकी लागत है. यदि एक एकड़ में पॉलीहाउस लगाना हो, तो लगभग 70-80 लाख रुपये तक खर्च आ सकता है. भारत में छोटे किसानों की संख्या अधिक है, और उनके लिए इतना महंगा ढांचा तैयार करना आसान नहीं होता. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कोई सस्ता विकल्प उपलब्ध है, जिससे छोटे किसान भी लाभ उठा सकें? इसका जवाब है-हाँ, समाधान मौजूद है!

लो टनल तकनीक

यदि आप पॉलीहाउस के विकल्प की तलाश कर रहे हैं, तो लो टनल तकनीक एक बेहतरीन समाधान हो सकता है. इसमें आप बांस या फाइबर से ढांचा तैयार कर सकते हैं और उसे सफेद पारदर्शी पॉलीथीन से ढक सकते हैं. यह पॉलीहाउस की तुलना में काफी सस्ता होता है. इसे तैयार करने में लगभग 30 रुपये प्रति वर्ग मीटर की लागत आती है, यानी एक एकड़ में लगभग 1 से 1.20 लाख रुपये खर्च होंगे.

Low Tunnel Farming
लो टनल फार्मिंग

इस तकनीक के कई फायदे हैं

  • इसमें नर्सरी तैयार की जा सकती है.
  • सब्जियों की खेती आसानी से संभव होती है.
  • फसलें मौसम की मार से सुरक्षित रहती हैं.
  • कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है.

वॉक-इन-टनल फार्मिंग

वॉक-इन-टनल फार्मिंग, लो टनल से थोड़ा अधिक महंगी होती है, लेकिन पॉलीहाउस की तुलना में फिर भी काफी सस्ती है. इसका निर्माण करने में 200 से 250 रुपये प्रति वर्ग मीटर की लागत आती है, यानी एक एकड़ में करीब 7-8 लाख रुपये खर्च होंगे. वॉक-इन-टनल की ऊंचाई आमतौर पर 6-7 फीट होती है.

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इसके निर्माण के लिए-

  • आप बिजली की पाइप या बांस की सहायता से ढांचा तैयार कर सकते हैं.
  • इसके ऊपर पॉलीथीन डालकर वॉक-इन-टनल बनाया जा सकता है.
Walk-in-Tunnel Farming
वॉक-इन-टनल फार्मिंग

इसका उपयोग कैसे किया जा सकता है?

  • सब्जियों और फलों की खेती के लिए.
  • उत्पादन बढ़ाने और फसलों को खराब मौसम से बचाने के लिए.
  • भंडारण (स्टोरेज) के लिए.
  • स्ट्रॉबेरी, तरबूज और अन्य फसलों की खेती के लिए.
  • पानी और खाद की बचत के लिए.