मिट्टी के हेल्थ में सुधार के लिए बहुत जरूरी है सॉइल टेस्टिंग, फसल कवर और फसल चक्र, नहीं तो…

फसल चक्र भी मिट्टी के हेल्थ के लिए बहुत अधिक मायने रखता है. मोनोकल्चर यानी लम्बे समय तक मिट्टी में एक ही फसल बोते रहने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति खत्म होने लगती है. इससे फसलों की पैदावार पर असर पड़ता है.

फसल के लिए सॉइल टेस्टिंग के मायने. Image Credit: @tv9

Soil Testing: अंधाधुंध रासायनिक खाद और कीटनाशकों के इस्तेमाल से मिट्टी की उर्वरा शक्ति कमजोर हो गई है. उसमें मौजूद पोषक तत्व पहले के मुकाबले कम हो गए हैं. इससे पैदावार भी प्रभावित हो रही है. इसलिए किसी भी फसल की बुवाई करने से पहले मिट्टी के हेल्थ की जांच करना बहुत जरूरी है . इससे मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी का पता आसानी से लग जाएगा. ऐसे भी दुनिया भर में एक तिहाई से अधिक मिट्टी अंधाधुंध रासायनिक खाद और कीटनाशकों के इस्तेमाल के चलते खराब हो गई है. अगर इसी गति से मिट्टी को नुकसान पहुंचता रहा तो दुनिया भर में भुखमरी और इकोलॉजी का नष्ट होना गंभीर मुद्दा बन जाएगा.

मिट्टी इस धरती पर जीवन का आधार है, यह भोजन के उत्पादन के साथ-साथ इको सिस्टम में तालमेल और जलवायु पर नियन्त्रण बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. हालांकि ओद्यौगिक खेती की बात करें तो इसमें सिर्फ शॉट टर्म मुनाफे पर ध्यान दिया जाता है, फिर चाहे मिट्टी की गुणवत्ता नष्ट ही क्यों न हो जाए. लोग अपने मुनाफे के लिए खेती के दौरान मोनोकल्चर, जरूरत से ज्यादा जुताई और रसायनों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे मिट्टी को गंभीर नुकसान पहुंचता हैं. अगर इस दिशा में जल्द से जल्द कदम न उठाए गए, तो हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए गंभीर चुनौती खड़ी हो सकती है.

क्योंकि मिट्टी जीवन को बनाए रखने के लिए जरूरी कंपोनेंट है. इस समस्या का एकमात्र समाधान है फसल चक्र और कवर फसलों को अपनाना, जिससे मिट्टी के क्षरण जैसे नकारात्मक प्रभावों में सुधार लाया जा सकता है. साथ ही मिट्टी की उत्पादकता भी बढ़ेगी.

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फसल कवर है बहुत जरूरी

मिट्टी के गिरते हेल्थ में सुधार लाने के लिए मौजूदा वक्त में कवर फसलें बेहद जरूरी हो गई हैं. कवर फसलों के तहत किसान वेच मटर, राई, जई, ब्रेसिका, मूली और सरसों की बुवाई कर सकते हैं. इससे मिट्टी के हेल्थ में सुधार आएगा. क्योंकि ब्रेसिका की जड़े गहरी होती हैं, जो मिट्टी को स्थिर करती हैं. साथ ही यह मिट्टी में मौजूद पोषक पदार्थों को बहने से रोकती हैं. ये फसलें मिट्टी के प्रदूषण को रोकने में भी कारगर हैं. इनमें मौजूदा ओर्गेनिक कंपोनेंट मिट्टी में मौजूद माइक्रोब्स को पोषण देते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है. इसके अलावा, ये खरपतवार को उगने और कीटों को पनपने से रोकते हैं. यानी ये प्राकृतिक कीट नियन्त्रक की तरह काम करते हैं.

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फसल चक्र के फायदे

फसल चक्र भी मिट्टी के हेल्थ के लिए बहुत अधिक मायने रखता है. मोनोकल्चर यानी लम्बे समय तक मिट्टी में एक ही फसल बोते रहने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति खत्म होने लगती है. साथ ही मिट्टी के अपरदन, बीमारियों और कीटों के पनपने की संभावना भी बढ़ जाती है. इसके बजाए अगर फसलों को चक्र में बोया जाए, तो मिट्टी में पोषक पदार्थ बने रहते हैं. क्योंकि अलग-अलग फसलों से मिट्टी की संरचना को अलग-अलग फायदे मिलते हैं. जैसे कुछ पौधों की जड़ें मिट्टी में जल निकासी को बढ़ाती हैं.

फसल चक्र में बोई जाने वाली कुछ फसलों से मिट्टी को पोषण मिलता है. ऐसे में रसायनिक कीटनाशकों की जरूरत भी कम हो जाती है. इसके अलावा फसल चक्र खरपतवार को उगने से भी रोकता है. इसलिए शाकनाशी की जरूरत भी नहीं पड़ती. इस तरह मिट्टी खुद-बखुद स्वस्थ रहती है और इसकी उर्वरता बढ़ जाती है. ऐसे में कार्बन के अवशोषण से जलवायु नियन्त्रण में भी मदद मिलती है. कुल मिलाकर ये दोनों तरीके निश्चित रूप से स्थायी खेती को बढ़ावा देते हैं और मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है.

खेती के सस्टेनेबल तरीकों को अपनाएं

खेती के सस्टेनेबल तरीकों से दुनिया की भर की अर्थव्यवस्थाओं और पर्यावरण को फायदा होता है. कवर फसलों और फसल चक्र को अपनाने से किसानों को उर्वरक, कीटनाशक और सिंचाई पर कम खर्च करना पड़ता है. अध्ययनों से साफ हो गया है कि ऐसा करने से खेती में उत्पादकता और मुनाफा बढ़ता है. साथ ही मिट्टी में ओर्गेनिक कार्बन की मात्रा बढ़ने से जलवायु परिवर्तन की समस्या कम होती है. इसके अलावा मिट्टी की जल धारण क्षमता बढ़ती है.

परागण और जैव विविधता को भी बढ़ावा

वहीं, मिट्टी के हेल्दी होने से परागण और जैव विविधता को भी बढ़ावा मिलता है, जो पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी है. हालांकि खेती के इन तरीकों के बारे में जागरुकता की कमी होना एक बड़ी चुनौती है. जिसकी वजह से किसान इसके फायदों को समझ नहीं पाते हैं. ऐसे में सरकार को इन प्रथाओं को बढ़ाने के लिए शैक्षणिक प्रोग्राम चलाने चाहिए. कुल मिलाकर कवर फसलें और फसल चक्र ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर किसानों एवं नीति निर्माताओं के बीच लम्बे समय से वाद-विवाद जारी है. इन समाधानों की अनदेखी भावी पीढ़ियों के लिए भोजन की कमी का गंभीर संकट पैदा कर सकती है.

(लेखक हर्षवर्धन भागचंदका IPL Biologicals Ltd के अध्यक्ष हैं.)