पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हो सकती है बड़ी कटौती! जानें प्रति लीटर कितनी गुंजाइश
कच्चे तेल की मौजूदा वैश्विक परिस्थितियां, OPEC की रणनीति, ट्रेड वॉर का प्रभाव, चुनावी मौसम और कंपनियों के बढ़ते मुनाफे को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती की पुरी संभावना बनी हुई है. हालांकि, इसका अंतिम फैसला तेल कंपनियों पर निर्भर करेगा.

Crude Oil Price Cut: चार अप्रैल 2025 की दोपहर दुनिया के तेल बाजारों में हलचल मच गई. कच्चे तेल की कीमतें अचानक लुढ़ककर चार साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गईं. अमेरिका और चीन के बीच ताजा व्यापारिक तनातनी का असर ऐसा हुआ कि कच्चे तेल की कीमतें एक ही दिन में 8 फीसदी से भी ज्यादा गिर गईं. ब्रेंट क्रूड की कीमत 64.62 डॉलर प्रति बैरल और WTI (वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट) 61.05 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई. ये कीमतें न सिर्फ कोविड-19 महामारी के दौर के बाद सबसे कम हैं, बल्कि 2021 के मध्य के बाद पहली बार इतनी तेजी से गिरावट देखी गई है.
भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए यह मौका राहत भरी खबर लेकर आता है. ऐसे में सवाल यह है कि क्या अब पेट्रोल-डीजल के दाम घटेंगे? और अगर घटते हैं, तो आम जनता को कितनी राहत मिल सकती है?
चार साल में सबसे निचली कीमत पर कच्चा तेल
रॉयटर्स के रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने अमेरिका से आने वाले सभी सामानों पर 34 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने का ऐलान किया है जो 10 अप्रैल से लागू होगा. यह अमेरिका के उस फैसले के जवाब में है जिसमें ट्रंप प्रशासन ने 180 देशों पर टैरिफ बढ़ाने की बात कही थी.
इस फैसले से न सिर्फ ट्रेड वॉर तेज हुआ है, बल्कि वैश्विक बाजारों में मंदी का डर भी लौट आया है. तेल सहित तमाम कमोडिटीज की कीमतें गिर गई हैं. यहां तक कि गोल्ड जैसे ‘सेफ हेवन’ माने जाने वाले एसेट की कीमत में भी गिरावट आई है.
तेल घटने की क्या हो सकती हैं वजहें?
भारत, अपनी जरूरत का करीब 85 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है. ऐसे में तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट भारत के लिए कई तरह की राहत लेकर आती है.
मार्च 2024 में, आम चुनावों से कुछ दिन पहले केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल के दाम 2 रुपये प्रति लीटर कम किए थे. उस वक्त कच्चा तेल करीब $83-84 प्रति बैरल के आस-पास था.
लेकिन अब जो हालात हैं वह कहीं ज्यादा अनुकूल हैं.अप्रैल 2024 में कच्चे तेल की कीमत 89.44 डॉलर थी जो अब लुढ़क कर आज 64.62 डॉलर पर आ गई हैं. एक साल से लगातार गिरते कच्चे तेल के दाम ये संकते देते हैं कि आने वाले महीनों में तेल के दाम में गिरावट जारी रहेगी और लोगों को राहत मिलेगा.

इसके अलावा, सितंबर 2024 में रेटिंग एजेंसी ICRA ने कहा था कि जब क्रूड की कीमतें 74 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई थीं, तब 2-3 रुपये प्रति लीटर तक कटौती संभव है. अब कीमतें उस स्तर से भी नीचे हैं, तो जाहिर है कि और बड़ी कटौती की गुंजाइश बनती है.
तेल उत्पादक देशों के समूह OPEC और उसके सहयोगियों (OPEC+) ने मई से उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है. पहले जहां 135,000 बैरल प्रतिदिन का इजाफा होना था, अब इसे बढ़ाकर 411,000 बैरल प्रतिदिन कर दिया गया है. इससे बाजार में सप्लाई बढ़ेगी और कीमतों पर और दबाव आएगा.
तेल मंत्री और एक्सपर्ट्स ने भी दिए संकेत
तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एक प्रोग्राम में कहा, “अगर ये ट्रेंड (कम होते तेल के दाम) जारी रहा तो फ्यूल प्राइसेज में कटौती की संभावना है.”
वहीं, पेट्रोलियम सचिव पंकज जैन ने भी हाल ही में कहा कि अगर कच्चा तेल लंबे समय तक सस्ते स्तर पर बना रहा तो तेल कंपनियां खुदरा कीमतों में कटौती पर विचार करेंगी. मार्च 2024 की कीमत में 2 रुपये की कटौती चुनावी रणनीति का हिस्सा मानी जाती है. अब जबकि कच्चे तेल की कीमतें और नीचे चली गई हैं और बिहार जैसा बड़ा चुनाव फिर से पास है, ऐसे में सरकार के लिए एक बार फिर कीमतें कम करना एक व्यवहारिक फैसला हो सकता है.
ऐसी स्थिति में जब सरकार से लेकर मंत्रालय तक कटौती की संभावनाओं को खुले तौर पर स्वीकार कर रहे हैं और ट्रेड मौसम भी सामने है तो कीमतें कम होने की उम्मीद काफी हद तक वाजिब लगती है. इसके अलावा, गोल्डमैन सैक्स ने भी अपने ब्रेंट और WTI के प्राइस टारगेट दिसंबर 2025 तक घटा दिए हैं. इन्होंने ब्रेंट के लिए 66 डॉलर और WTI के लिए 62 डॉलर प्रति बैरल का टारगेट प्राइस सेट किया है.
कितनी गिर सकती है पेट्रोल-डीजल की कीमत?
ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के पास इस वक्त राहत देने की पर्याप्त गुंजाइश है. Emkay की रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2024 में जब क्रूड की कीमत 70-75 रुपये प्रति बैरल होने की बात थी तो उस वक्त कंपनियों को पेट्रोल और डीजल पर 7.5 रुपये से 11.5 रुपये प्रति लीटर तक का ग्रॉस मार्जिन मिल रहा था. अब क्योंकि तेल के दाम 64 डॉलर पर आ गए हैं तो कंपनियों को मिलने वाला ग्रॉस मार्जिन और बढ़ गया है. एक बैरल में 159 लीटर होते हैं. इसका मतलब है कि एक लीटर ब्रेंड क्रूड ऑयल के दाम 0.40 डॉलर पर आ गए. अगर इसे रुपए में कंवर्ट किया जाए तो भारत में कच्चे तेल के मौजूदा दाम 33.82 रुपए प्रति लीटर होता है.अगर तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें ऐसे ही बनी रहती हैं, तो कंपनियों के पास 7-8 रुपये प्रति लीटर तक की कटौती का स्पेस है, यानी पेट्रोल-डीटल 7-8 रुपये कम दाम पर मिलेंगे.
भारत में अब पेट्रोल और डीजल की कीमतों को ‘डायनामिक प्राइसिंग’ के तहत प्रतिदिन बाजार के अनुसार तय किया जाता है. इसका मतलब है कि सरकार प्रत्यक्ष रूप से कीमत तय नहीं करती,बल्कि यह कंपनियों (HPCL, IOCL, BPCL) के निर्णय पर निर्भर करता है कि वे अपने मार्जिन से आम जनता को कितना लाभ दें. ऐसे में आम नागरिक को राहत देने का अंतिम फैसला कंपनियों के हाथ में है.
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भारत के लिए क्या मतलब है इस गिरावट का?
अगर कीमतें कुछ समय तक 65 डॉलर प्रति बैरल या उससे नीचे बनी रहती हैं तो भारत को सीधे तौर पर राहत मिलती है:
- आयात बिल घटता है
- महंगाई नियंत्रित रहती है
- सरकार को सब्सिडी पर खर्च कम करना पड़ता है
- कंपनियों को राहत देने का अवसर मिलता है
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