रूस, कनाडा समेत इन देशों पर नहीं लगा टैरिफ, ये है ट्रंप की दरियादिली या कुछ और…?
यूएस राष्ट्रपित डोनाल्ड ट्रंप के टेरिफ वॉर से जहां पूरी दुनिया हिली हुई है, वहीं कुछ देश ऐसे भी हैं जो टैरिफ की मार से बच गए हैं. ऐसे में बाकी देशों में इसे लेकर हलचल मची हुई है. हर कोई जानना चाहता है कि आखिर इसके पीछे क्या वजह है, तो ट्रंप की क्या है प्लानिंग आइए जानते हैं.
Trump Tariff: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल की देर रात को अपने रेसिप्रोकल टैरिफ के ऐलान से पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है. टैरिफ में 10% से लेकर 50% तक का इजाफा किया गया है. ट्रंप के टैरिफ वॉर से भारत (26%), यूरोपीय संघ (20%) और वियतनाम (46%) जैसे बड़े व्यापारिक साझेदार भी अछूते नहीं रहे, लेकिन इस लिस्ट में कुछ देशों के नाम गायब मिले यानी इन पर टैक्स नहीं लगाया गया. ऐसे देशों में रूस, कनाडा, मैक्सिको, नॉर्थ कोरिया और क्यूबा शामिल हैं. तो आखिर इन देशों को क्यों टैरिफ लिस्ट से बाहर रखा गया है, क्या ये यूएस राष्ट्रपति ट्रंप की इन देशों के प्रति दरियादिली है या कुछ और आइए समझते हैं.
पहले ही झेल रहें टैरिफ की मार
कनाडा और मैक्सिको को 2 अप्रैल को हुए रेसिप्रोकल टैरिफ की मार से भले ही राहत मिल गई हो, लेकिन ये यूएस राष्ट्रपति की कोई मेहरबानी नहीं है. दरअसल, इस साल की शुरुआत में ही अमेरिका ने इन दोनों देशों से आने वाले सामानों पर 25% टैरिफ लगा दिया था. ट्रंप ने कनाडा के एनर्जी और पोटाश पर 10% का टैरिफ लगा रखा है. बता दें USMCA (यूएस-मैक्सिको-कनाडा समझौता) के तहत आने वाले सामानों को इन नए शुल्कों से छूट मिली हुई है. इसके अलावा रूस, नॉर्थ कोरिया, क्यूबा और बेलारूस का नाम भी नई टैरिफ लिस्ट से गायब है. व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि इन देशों पर पहले से ही सख्त प्रतिबंध हैं, जिससे अमेरिका के साथ इनका व्यापार लगभग खत्म हो चुका है. ऐसे में इन पर अब नया शुल्क लगाने का कोई मतलब नहीं है.
जवाबी कार्रवाई को तैयार ये देश
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने ब्लूमबर्ग से कहा कि वे ट्रंप के इस टैरिफ का जवाब देंगे. वे अपने श्रमिकाें को बचाने के लिए हर कदम उठाएंगे. मैक्सिको भी इस सिलसिले में जवाबी कार्रवाई की तैयारी में है. राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस पर खुलासा करेंगी.
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किन देशों पर साधा निशाना
ट्रंप का ये टैरिफ प्लान उन देशों पर केंद्रित है, जो अमेरिका के साथ बड़ा ट्रेड सरप्लस रखते हैं. मिसाल के तौर पर, चीन का 2024 में अमेरिका के साथ 295 अरब डॉलर का सरप्लस था, लिहाजा उस पर 34% टैरिफ लगाया गया है. एशियाई देशों और यूरोपीय संघ का भी अमेरिका के साथ बड़ा व्यापार घाटा है, इसलिए वे टैरिफ लिस्ट में ऊपर हैं. ट्रंप ने गैर-टैरिफ बाधाओं जैसे VAT और अनुचित मुद्रा दरों को भी ध्यान में रखा है.