डोनाल्ड ट्रंप के दिमाग में कहां से आया टैरिफ का आइडिया, 40 साल पुराना मामला; जापान से कनेक्शन

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से रेसिप्रोकल टैरिफ की बात कर रहे थे, जिसका मतलब है "जैसे को तैसा"-जो देश अमेरिका पर जितना टैक्स लगाएगा, अमेरिका भी उस पर उतना ही टैक्स लगाएगा. आज इसका आधिकारिक ऐलान कर दिया गया है, हालांकि यह डिस्काउंटेड रेसिप्रोकल टैरिफ है. ट्रंप ने भारत पर 26 फीसदी वहीं चीन पर 34 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा की है. हालांकि, टैरिफ का यह विचार ट्रंप के लिए नया नहीं है. इसका इतिहास काफी पुराना है, जब वे राष्ट्रपति भी नहीं थे, और इसका जापान से एक खास कनेक्शन है.

टैरिफ-वॉर Image Credit: money9live.com

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आज डिस्काउंटेड रेसिप्रोकल टैरिफ का ऐलान कर दिया है. इसकी चर्चा वे लंबे समय से कर रहे थे. उन्होंने भारत और चीन समेत दुनिया के कई देशों पर टैरिफ लगाया है. ट्रंप ने जहां भारत पर 26 फीसदी टैरिफ का ऐलान किया है, वहीं चीन पर 34 फीसदी, जापान पर 24 फीसदी और वियतनाम पर 46 फीसदी का टैरिफ लगाया है. यह पहला मौका नहीं है जब ट्रंप ने विभिन्न देशों पर टैरिफ लगाया है.

इससे पहले भी वे कनाडा और मैक्सिको जैसे देशों पर इसका ऐलान कर चुके हैं. ट्रंप टैरिफ को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करते आए हैं और उनके पहले कार्यकाल में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला था. लेकिन सवाल यह है कि ट्रंप के दिमाग में टैरिफ की यह सोच कैसे आई? आइए जानते हैं इसकी पूरी कहानी.

40 साल पुराना है यह आइडिया

ट्रंप ने जिस तरह से आज दुनिया के कई देशों पर टैरिफ लगाया है, उसका आइडिया करीब 40 साल पुराना है. 1980 के दशक में सीएनएन के पत्रकार लैरी किंग के साथ एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा था कि वे अमेरिका को दूसरे देशों द्वारा आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाते हुए देखकर थक चुके हैं.

1987 में अपनी किताब ‘Trump: The Art of the Deal’ के प्रकाशित होने के बाद उन्होंने कई इंटरव्यू दिए थे. इस दौरान, द ओपरा शो के होस्ट ओपरा विनफ्रे के साथ बातचीत में उन्होंने कहा था कि वे अमेरिका के सहयोगियों से उचित कीमत वसूलेंगे. कई लोग इसे उनके राष्ट्रपति बनने की शुरुआती योजना के संकेत के रूप में देखते हैं.

जापान से है खास कनेक्शन

साल 1990 में जब ट्रंप की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, तब उन्हें पैसों की जरूरत पड़ी. फंड जुटाने के लिए उन्होंने जापान का रुख किया. यह पहला मौका नहीं था जब कोई अमेरिकी कारोबारी जापानी अरबपतियों से मदद मांग रहा था. उस दौर में जापानी निवेशक अमेरिकी कंपनियों का अधिग्रहण करने के अवसर तलाश रहे थे.

यही वह समय था जब ट्रंप का टैरिफ को लेकर नजरिया बदला और उन्होंने इस विषय पर चर्चा शुरू की. द ट्रंप ऑर्गनाइजेशन की पूर्व कार्यकारी अधिकारी बारबरा रेस ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि ट्रंप को उस समय लगा कि अमेरिका जापान को सैन्य सहायता तो दे रहा है, लेकिन बदले में उसे कोई खास फायदा नहीं हो रहा.

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ट्रंप को नहीं पसंद थी जापान को मुफ्त सैन्य सहायता

1960 में अमेरिका और जापान के बीच एक संधि हुई थी, जिसके तहत जापान की सुरक्षा की जिम्मेदारी अमेरिका के पास थी. इस संधि के कारण जापान को अपनी सैन्य जरूरतों की चिंता किए बिना तेजी से आर्थिक विकास करने का अवसर मिला. ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में जापान के प्रोडक्ट अमेरिकी कंपनियों को कड़ी टक्कर देने लगे.

उस दौर में ट्रंप ने एक लेटर प्रकाशित किया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि जापानी सुरक्षा चिंताओं से मुक्त होकर अपनी अर्थव्यवस्था को तेजी से बढ़ा रहे हैं, जबकि अमेरिका उनकी रक्षा कर रहा है. ट्रंप ने उस समय समाधान के रूप में यह सुझाव दिया था कि जापान जैसे अमीर देशों पर टैरिफ लगाया जाना चाहिए.