दिग्गज कंपनी पर ED का बड़ा एक्शन, जब्त हुई 156 करोड़ की संपत्ति; जानें कैसे हुआ ये बड़ा फ्रॉड
ED ने लक्ष्मी प्रिसिजन स्क्रूज लिमिटेड नाम की कंपनी पर कार्रवाई करते हुए 156.33 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की हैं. कंपनी पर आरोप है कि उसने बैंकों से 176.70 करोड़ रुपये का कर्ज लिया और उसे नहीं चुकाया.

ED Action: हरियाणा की एक स्क्रू बनाने वाली कंपनी लक्ष्मी प्रिसिजन स्क्रूज लिमिटेड के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कंपनी से जुड़े 156.33 करोड़ रुपये की 12 संपत्तियों को जब्त कर लिया है. ED ने अस्थायी रूप से इनकी अचल संपत्तियों को जब्त किया है. यह कार्रवाई इसलिए हुई क्योंकि कंपनी ने केनरा बैंक और SBI से 176.70 करोड़ रुपये का लोन लिया था और उसे चुकाया नहीं था. ED की ये कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत की गई है.
अपने सेक्टर की बड़ी कंपनी
जिन संपत्तियों को जब्त किया गया है, वो दिल्ली, मुंबई, गुरुग्राम और रोहतक में स्थित हैं. इनमें 20 एकड़ से ज्यादा की सात कमर्शियल जमीन है, रोहतक और गुरुग्राम में चार एकड़ की कृषि जमीन और मुंबई-दिल्ली में चार कमर्शियल फ्लैट-कम-ऑफिस शामिल हैं.
बता दें लक्ष्मी प्रिसिजन स्क्रूज लिमिटेड की 1968 में शुरू हुई थी. यह कंपनी मुख्य रूप से हाई टेन्साइल फास्टनर्स बनाती है और देश की दूसरी सबसे बड़ी निर्माता मानी जाती है. इसका रजिस्टर्ड ऑफिस रोहतक में है.
कैसे हुआ फ्रॉड?
CBI की जांच के आधार पर यह कार्रवाई हुई है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, CBI ने कंपनी और उसके प्रमोटर्स ललित के. जैन, राकेश के. जैन, विजय कुमार जैन के खिलाफ FIR दर्ज की थी. आरोप है कि इन्होंने एक से ज्यादा बैंकों को धोखे में रखकर लोन लिया, गिरवी संपत्तियां बिना इजाजत बेच दी और जिन कंपनियों से साथ कारोबार किया उसे अब फर्जी माना जा रहा है जिससे बैंकों को 176.70 करोड़ का नुकसान हुआ है.
ED की जांच में पता चला कि कंपनी ने फर्जी स्टॉक स्टेटमेंट दिए और ट्रेडिंग के नाम पर फंड्स को डायवर्ट किया. कंपनी ने अपनी वित्तीय स्थिति को बेहतर दिखाकर ज्यादा क्रेडिट लिमिट ली और पैसे का गलत इस्तेमाल किया. कंपनी ने कुछ गिरवी जमीनों को बिना बैंक की इजाजत किसी और जमीन से बदल दिया.
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CBI ने अपनी जांच में पाया कि कंपनी ने नकली कर्जदार दिखाकर 1.81 करोड़ रुपये का स्टॉक बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया, जिससे उन्हें बैंक से ज्यादा लोन मिल गया. अप्रैल 2018 में कंपनी का खाता NPA घोषित हो गया और जांच में पता चला कि कंपनी के प्लांट में 214.95 करोड़ का स्टॉक कम पाया गया, जिसकी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई.
इसके अलावा CBI ने ये भी पाया कि कंपनी ने फर्जी लेटर ऑफ क्रेडिट और खरीदारी दिखाई, जिससे पैसा घूम-फिर कर उन्हीं बैंकों में वापस गया. कंपनी ने 32.81 करोड़ रुपये को लोन चुकाने की बजाय पर्सनल अकाउंट्स में ट्रांसफर कर दिया.
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