61000 रुपये पर आएगा सोना! कीमतें होंगी धड़ाम, इस दिग्गज ने की भविष्यवाणी; जानें क्यों
सोना रिकॉर्ड ऊंचाई पर है लेकिन बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में इसकी कीमतें काफी हद तक नीचे आ सकती हैं. अगर ऐसा हुआ, तो निवेशकों की रणनीतियां पूरी तरह बदल सकती हैं और सोने की चमक नए सिरे से परखी जाएगी. विश्लेषकों का सुझाव है कि निवेशकों को मौजूदा तेजी के बावजूद सतर्क रहना चाहिए और सोने की कीमतों पर नजर बनाए रखनी चाहिए.
Gold Price Predication: सोने की कीमतों में इस साल जबरदस्त उछाल देखा गया है जिससे निवेशकों को बड़ा फायदा हुआ, लेकिन आम खरीदारों के लिए सोना खरीदना मुश्किल हो गया है. सोने की चमक इतनी तेज रही कि इसने 4 मार्च यानी गुरुवार को नया रिकॉर्ड बनाते हुए 3,160 डॉलर प्रति औंस का स्तर छू लिया. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह तेजी ज्यादा समय तक टिक नहीं पाएगी और आने वाले वर्षों में सोने की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिल सकती है.
कुछ विश्लेषकों का अनुमान है कि सोने की कीमतों में 36 फीसदी तक गिरावट आ सकती है जिससे यह 2,000 डॉलर प्रति औंस तक नीचे आ सकता है. अगर ऐसा हुआ तो निवेशकों के लिए यह एक बड़ा झटका होगा, लेकिन आम खरीदारों को राहत मिल सकती है. भारतीय बाजार में सोना 6100 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खरीद सकेंगे.
कीमतों में गिरावट की भविष्यवाणी
Morningstar के विश्लेषक जॉन मिल्स इस समय सोने को लेकर सबसे ज्यादा नकारात्मक अनुमान लगाने वालों में से एक हैं. जबकि वॉल स्ट्रीट के अन्य विश्लेषक सोने के लिए ऊंचे टारगेट तय कर रहे हैं, मिल्स का मानना है कि आने वाले वर्षों में सोने की कीमतों में तेज गिरावट हो सकती है. पहले उन्होंने 2029 तक सोने की कीमत 1,820 डॉलर प्रति औंस तक गिरने का अनुमान लगाया था लेकिन अब इसे संशोधित करते हुए 2,000 डॉलर प्रति औंस कर दिया है. वहीं, 2025 से 2027 के बीच सोने की औसत कीमत 3,170 डॉलर प्रति औंस रहने का अनुमान है, जो पहले 2,810 डॉलर प्रति औंस थी.
अगर मिल्स का यह अनुमान सही साबित होता है तो सोने की कीमतें अपने मौजूदा रिकॉर्ड स्तर से 36 फीसदी तक गिर सकती हैं और बीते एक साल में हुई सारी बढ़त खत्म हो जाएगी.
क्यों गिरेगी सोने की कीमत?
बिजनेस इनसाइडर से बात के दौरान मिल्स ने कहा कि सोने की कीमतों में गिरावट के पीछे तीन मुख्य वजहें होंगी:
- सोने की सप्लाई में इजाफा
सोने की बढ़ती कीमतों ने खनन कंपनियों को ज्यादा प्रोडक्शन करने के लिए प्रेरित किया है. जब बाजार में सोने की सप्लाई ज्यादा होगी तो इसकी कीमतों पर दबाव बढ़ेगा. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक, हाल के वर्षों में सोने की माइनिंग बेहद लाभदायक साबित हुई है. 2024 की दूसरी तिमाही में सोना खनन करने वालों की औसत लाभ मार्जिन 950 डॉलर प्रति औंस रही. यह आंकड़ा 2012 के बाद सबसे ज्यादा है.
इसके अलावा, रिसायकल किए गए सोने की मात्रा में भी इजाफा होने की उम्मीद है जिससे बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति बढ़ेगी और कीमतें और नीचे आ सकती हैं.
- मांग में कमी आ सकती है
इस साल निवेशकों और सेंट्रल बैंकों ने सोने को सुरक्षित संपत्ति मानते हुए जमकर खरीदा, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि यह ट्रेंड लंबे समय तक जारी नहीं रहेगा. हालांकि, कुछ संकेत मिल रहे हैं कि सोने की इस जबरदस्त मांग में कमी आ सकती है. World Gold Council, द्वारा किए गए एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में 71 फीसदी केंद्रीय बैंकों ने कहा कि वे अगले 12 महीनों में अपनी सोने की होल्डिंग को या तो स्थिर रखेंगे या उसमें कटौती करेंगे.
इसके अलावा, विश्लेषक जॉन मिल्स का मानना है कि निवेशकों की ओर से सोने की मांग में भी गिरावट आ सकती है. इसकी वजह यह है कि आर्थिक अनिश्चितता के कारण बढ़ी सोने की कीमतें अक्सर शॉर्ट टर्म होती हैं. ऐसे में केंद्रीय बैंकों की खरीददारी सामान्य स्तर पर लौट सकती है और गोल्ड ईटीएफ (एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड) फ्लो भी स्थिर हो सकता है. जब बाजार में सोने की सप्लाई ज्यादा होगी और मांग में कमी आएगी तो स्वाभाविक रूप से कीमतें गिरेंगी.
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- संकेत मिल रहे हैं कि कीमतें शिखर पर पहुंच चुकी हैं
मिल्स का कहना है कि सोने का बाजार इस समय एक ही पैटर्न को दोहरा रहा है, जिससे संकेत मिल रहे हैं कि कीमतें अपने टॉप के नजदीक हैं. यानी ये अब इससे और आगे नहीं जा सकती.
एक अहम संकेत यह है कि इस समय सोने की इंडस्ट्री में अधिग्रहण और विलय (M&A) की गतिविधियां अपने चरम पर हैं. ऐतिहासिक रूप से जब किसी बाजार में डीलमेकिंग गतिविधियां तेज होती हैं तो इसका मतलब होता है कि कीमतें अपने चरम पर पहुंच चुकी हैं. S&P ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में सोने के क्षेत्र में M&A गतिविधियां साल-दर-साल 32 फीसदी बढ़ी हैं.