भारत पर 26 नहीं 27 फीसदी लगेगा टैरिफ, व्हाइट हाउस के दस्तावेज में दिखा अंतर, दिग्गज बोले फर्क नहीं पड़ता
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल को जवाबी टैरिफ प्लान का ऐलान कर दिया है. यह टैरिफ व्यवस्था 2 अप्रैल को ही आधी रात से लागू हो गई है. हालांकि, ट्रंप की तरफ से रोज गार्डन में जो ऐलान किए गए और बाद में व्हाइट हाउस की तरफ से जो आधिकारिक दस्तावेज जारी किए गए, उनमें कई देशों के टैरिफ अंतर देखने को मिला है.

अमेरिका के साथ कारोबार करने वाले देशों पर बुधवार 2 अप्रैल से जवाबी टैरिफ लागू कर दिया गया है. डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस के रोज गार्डन से टैरिफ प्लान का ऐलान करते हुए बताया था कि भारत पर 26 फीसदी टैरिफ लगाया जाएगा. हालांकि, बाद में जब व्हाइट हाउस की तरफ से आधिकारिक दस्तावेज जारी किए गए, तो इनमें भारत पर 27 फीसदी टैरिफ बताया गया है. जवाबी टैरिफ नीति के तहत सभी अमेरिकी व्यापारिक साझेदार देशों पर 5 अप्रैल से 10% टैरिफ लागू होने जा रहा है.
14 देशों के डाटा में गड़बड़ी
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक व्हाइट हाउस की तरफ से जारी आधिकारिक एनेक्स में जवाबी टैरिफ दरों की जो लिस्ट दी है, उसके डाटा और ट्रंप की तरफ से रोज गार्डन में दिखाए गए चार्ट के डाटा में कम से कम 14 देशों पर लगने वाले टैरिफ में अंतर देखने को मिला है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में कहा गया गया है कि व्हाइट हाउस की तरफ से इस संबंध में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है, न कोई बयान दिया गया है.
किन-किन देशों का बढ़ा टैरिफ?
ब्लूमबर्ग के मुताबिक व्हाइट हाउस एनेक्स के मुताबिक भारतीय उत्पादों के आयात पर 27% टैरिफ लगाया जाएगा. जबकि, ट्रंप की तरफ से दिखाए गए चार्ट में यह 26 फीसदी था. इसी तरह एनेक्स के मुताबिक दक्षिण कोरिया 25% के बजाय 26% पर टैरिफ लगाया गया है. अलग-अलग दरों वाले अन्य देशों में बोत्सवाना, कैमरून, मलावी, निकारागुआ, नॉर्वे, पाकिस्तान, फिलीपींस, सर्बिया, दक्षिण अफ्रीका, थाईलैंड, वानुअतु और फॉकलैंड द्वीप शामिल हैं.
दिग्गज बोले फर्क नहीं पड़ता
ट्रंप के टैरिफ प्लान के हिसाब से भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर 27 से 10 फीसदी के बीच टैरिफ देना होगा. भारतीय उद्योग दिग्गजों का कहना है कि इससे वैश्विक व्यापार और विनिर्माण मूल्य श्रृंखलाओं में बड़ा बदलाव आ सकता है. हालांकि, भारतीय उद्योगों पर इसका ज्यादा असर नहीं होगा. ASSOCHAM के अध्यक्ष संजय नायर का कहना है, ‘कुल मिलाकर, ऐसा लगता है कि अमेरिकी बाजार में भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता सापेक्ष आधार पर बहुत कम प्रभावित हुई है. फिर भी हमारे उद्योगों को टैरिफ के प्रभाव को कम करने के लिए निर्यात दक्षता और मूल्य संवर्धन के लिए ठोस प्रयास करने चाहिए.’ इसी तरह पीएचडीसीसीआई के अध्यक्ष हेमंत जैन ने कहा कि भारत की मजबूत औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को संतुलित करेगी और अल्पावधि में जीडीपी पर इसका केवल 0.1 प्रतिशत प्रभाव पड़ेगा.
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