टैरिफ की चोट से फार्मा को छूट, भारतीय निर्यात के लिए संजीवनी, अमेरिकी नागरिकों को राहत
ट्रंप के टैरिफ प्लान में फार्मा इंडस्ट्री पर किसी तरह के कोई नए शुल्क नहीं लगाने का फैसला किया गया है. इस फैसले का सबसे ज्यादा फायदा भारतीय कंपनियों को मिलने वाला है. लेकिन, ट्रंप जहां एक तरफ अमेरिका में आयात होने वाली हर चीज पर टैरिफ लगाना चाहते हैं, तो ऐसे में भारतीय फार्मा कंपनियों को यह छूट क्यों दी है, जानते हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल को करीब 60 देशों पर जवाबी टैरिफ का ऐलान किया. ट्रंप के टैरिफ प्लान में भारत पर सीधे तौर पर 27 से 10 फीसदी के बीच में टैरिफ लगाने की बात की गई है. हालांकि, ट्रंप ने फार्मा इंडस्ट्री को टैरिफ की चोट से छूट दी है. इसका सबसे ज्यादा फायदा भारत को मिलेगा. इसके अलावा जापान और आयलैंड जैसे देशों को भी इसका फायदा मिल सकता है, जो अमेरिका को दवाएं निर्यात करते हैं.
जानकारों का मानना है कि ट्रंप की तरफ से फार्मा इंडस्ट्री को छूट मिलना, भारत के निर्यात के लिए तो संजीवनी की तरह है ही, इसके साथ ही यह अमेरिकी लोगों के लिए भी बड़ी राहत है, क्योंकि अगर फार्मा इंडस्ट्री पर टैरिफ लगता, तो वे महंगी दवाएं खरीदने को मजबूर हो जाते. PTI की एक रिर्पोट के मुताबिक भारतीय फार्मास्युटिकल अलायंस यानी IPA के महासचिव सुदर्शन जैन का कहना है कि यह निर्णय सार्वजनिक स्वास्थ्य, आर्थिक स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा में लागत प्रभावी, जीवन रक्षक जेनेरिक दवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है.
कारोबार 500 अरब डॉलर पहुंचाना लक्ष्य
भारत और अमेरिका पिछले कुछ वर्षों में रक्षा, रणनीति और आर्थिक मोर्चे पर काफी करीब आए हैं. दोनों देश एक-दूसर के साथ कारोबार बढ़ाना चाहते हैं. इसके लिए पिछले दिनों ही दोनों देशों ने द्विपक्षीय कारोबार को 500 अरब डॉलर से ज्यादा पहुंचाने का लक्ष्य रखा है. फार्मा इंडस्ट्री दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों में अहम भूमिका में है.
भारतीय दवाओं से बच रहे अरबों डॉलर
भारत की फार्मा इंडस्ट्री को ट्रंप ने यूं ही टैरिफ से बाहर नहीं रखा है. असल में भारत की सस्ती जेनरिक दवाओं की वजह से अमेरिकी लोगों को हर साल 219 अरब डॉलर से ज्यादा की बचत होती है. अगले पांच वर्ष में भारतीय कंपनियों की तरफ से सप्लाई की जाने वाली जेनरिक दवाओं से अमेरिकी लोगों को 1.3 लाख करोड़ डॉलर की बचत होने की संभावना है. इसे लेकर फार्मेक्सिल के उपाध्यक्ष भाविन मुकुंद मेहता का कहना है कि भारत अमेरिका से 80 करोड़ डॉलर के फार्मास्यूटिकल उत्पादों का आयात करता है और 8.7 अरब डॉलर का निर्यात करता है. हालांकि, भारत की इन जेनरिक दवाओं की जगह अमेरिकी लोग ब्रांडेड दवाएं खरीदने लगें, तो उन्हें इससे कई गुना ज्यादा कीमत चुकानी होगी.