दुनिया में भारतीय खिलौने की मांग 40 फीसदी बढ़ी, 2032 तक सरकार का ग्लोबल हब बनाने का प्लान

पिछले 5 वर्षों में भारत के टॉय इंडस्ट्री ने एक्सपोर्ट में 40 फीसदी वृद्धि और इंपोर्ट में 79 फीसदी की गिरावट दर्ज की है. सरकार की नीतियों, जैसे नेशनल एक्शन प्लान फॉर टॉयज (2025-26), क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर (QCO 2020) और इंपोर्ट ड्यूटी ने घरेलू मैन्यूफैक्चिरिंग को मजबूती दी है. भारत अब नेट एक्सपोर्टर बन चुका है और ग्लोबल टॉय मार्केट में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहा है, जो 2032 तक $179.4 बिलियन तक पहुंच सकता है.

भारत अब नेट एक्सपोर्टर बन चुका है और ग्लोबल टॉय मार्केट में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहा है. Image Credit:

Toy Industry: देश की खिलौना इंडस्ट्री ने पिछले पांच साल में शानदार ग्रोथ दिखाते हुए अपने एक्सपोर्ट में 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की है, जबकि इस दौरान इसके इंपोर्ट में 79 फीसदी की कमी देखने को मिली. इस प्रदर्शन के चलते इसका ग्लोबल खिलौना मार्केट में हिस्सेदारी भी बढ़ी है और साल 2032 तक इसके 179 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है. अहम बात यह कि साल 2023 तक इंडस्ट्री की ग्लोबल लेवल मात्र 1.5 बिलियन की हिस्सेदारी थी. संभावनाओं को देखते हुए सरकार ने साल 2025-26 के बजट में नेशनल एक्शन प्लान फॉर टॉयज का भी ऐलान किया है. सरकार का मकसद है कि इस स्कीम के तहत क्लस्टर डेवलपमेंट और स्किल को बढ़ावा देने के साथ-साथ मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट को बढ़ावा मिले.

सरकार के फैसले से फायदा

केंद्र सरकार ने 2020 में क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर (QCO) लागू करते हुए खिलौनों के लिए क्वालिटी स्टैंडर्ड को बढ़ा दिया था. इसके अलावा सरकार ने बाहर से इंपोर्ट होने वाले खिलौनों पर इंपोर्ट ड्यूटी को 20 फीसदी से बढ़ाकर 60 फीसदी कर दिया था. इसका सीधा असर चीन से आने वाले खिलौनों पर पड़ा और इससे डोमेस्टिक मार्केट को बढ़ावा मिला. इससे पहले चीन के खिलौनों का बाजार में एकतरफा वर्चस्व था.

ये भी पढ़ें- Nippon India और HDFC सहित ये हैं देश के टॉप 10 गोल्ड ETF, एक साल में दिए 39 फीसदी का रिटर्न

क्या कहते हैं आंकड़े

पंजाब नेशनल बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2018-2019 में 65 मिलियन आयात के तुलना में वित्त वर्ष 2023-24 में इसमें 79 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है. इस दौरान इसके एक्सपोर्ट में करीब 40 फीसदी की ग्रोथ रही और यह 109 मिलियन से बढ़कर 152 मिलियन पहुंच गया है.

नेट एक्सपोर्टर बना भारत

आंकड़ों से पता चलता है कि भारत अब खिलौनों का नेट एक्सपोर्टर बन गया है. सरकार के मेक इन इंडिया और इंडस्ट्री के अच्छे प्रदर्शन के चलते आज यह इंडस्ट्री आत्मनिर्भर बनने की राह पर है. इसने अपनी क्वालिटी में भी सुधार करते हुए एक मजबूत इकोसिस्टम बनाया है, जिसकी वजह से यह ग्लोबल मार्केट में अपनी छाप छोड़ने में सफल रहा है. इस सेक्टर की ग्रोथ ना सिर्फ देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही है बल्कि भारत के ग्लोबल एक्सपोर्टर बनने के सपने को भी पूरा कर रही है.