Rupay Credit Card पर बढ़ सकती है ट्रांजैक्शन कॉस्ट, NPCI के इस कदम से हुआ असर

रुपे क्रेडिट कार्ड से लेनदेन की लागत कुछ व्यापारियों के लिए बढ़ने वाली है. ऐसा इसलिए क्योंकि नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने इंटरचेंज फीस में बढ़ोतरी की घोषणा की है. यह फीस रुपे क्रेडिट कार्ड के सभी प्रकारों पर लागू होगी. इनमें क्लासिक, प्लेटिनम और सेलेक्ट शामिल है.

Rupay Credit Card पर बढ़ सकती है ट्रांजैक्शन कॉस्ट Image Credit: Money 9

Rupay Credit Card: 1 मई से रुपे क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने वालों के लिए बड़ी खबर आ सकती है. दरअसल, रुपे क्रेडिट कार्ड से लेनदेन की लागत कुछ व्यापारियों के लिए बढ़ने वाली है. ऐसा इसलिए क्योंकि नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने इंटरचेंज फीस में बढ़ोतरी की घोषणा की है. यह फीस रुपे क्रेडिट कार्ड के सभी प्रकारों पर लागू होगी. इनमें क्लासिक, प्लेटिनम और सेलेक्ट शामिल है. यह बदलाव घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह के लेनदेन पर प्रभाव डालेगा. NPCI के सर्कुलर के अनुसार, इस फीस पर GST भी लगेगा.

क्या आपको यह इंटरचेंज फीस देनी पड़ेगी?

यह फीस सीधे ग्राहकों यानी आप पर नहीं लगती. यह फीस व्यापारी के बैंक को आपके कार्ड जारी करने वाले बैंक को देनी पड़ती है. लेकिन, अगर यह फीस बढ़ती है तो व्यापारी इसे ग्राहकों पर डाल सकते हैं. इससे आपकी जेब पर असर पड़ सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह फीस व्यापारी के प्रकार और कार्ड की श्रेणी पर निर्भर करती है.

औसतन, यूटिलिटी व्यापारियों के लिए यह 1 फीसदी और ई-कॉमर्स लेनदेन के लिए 1.7 फीसदी है. ट्रैवल जैसी कैटेगरी में यह 1.7 फीसदी से 1.8 फीसदी तक हो सकती है. UPI के जरिए रुपे क्रेडिट कार्ड से 2,000 रुपये तक के लेनदेन पर पहले कोई फीस नहीं थी. लेकिन अब चुनिंदा व्यापारियों के लिए यह 1.1 फीसदी से 2.02 फीसदी तक है.

इतनी लगेगी फीस

क्लासिक कार्ड के लिए फिजिकल लेनदेन पर 1.1 फीसदी और ऑनलाइन पर 1.6 फीसदी फीस होगी. यूटिलिटी व्यापारियों के लिए प्लेटिनम कार्ड पर 1.85 फीसदी और सेलेक्ट कार्ड पर 2.02 फीसदी होगी. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे छोटे व्यापारियों पर दबाव बढ़ेगा और वे कीमतें बढ़ा सकते हैं.

आमतौर पर RBI कहता है कि व्यापारी यह फीस ग्राहकों पर नहीं डाल सकते. लेकिन जिन कैटेगरी में खर्च ज्यादा होता है जैसे ट्रैवल, वहां फीस ज्यादा होती है. जरूरी सेवाओं जैसे शिक्षा या सरकारी लेनदेन में यह कम रहती है.