ये 5 प्रोडक्ट सबसे ज्यादा अमेरिका को बेचता है भारत, टैरिफ वॉर से 61000 करोड़ का झटका!
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ऐलान के बाद से दूसरे देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया जा रहा है. ऐसे में यूएस उन देशों पर उतना ही टैरिफ लगाएगा जितना दूसरे देश अमेरिकी सामानों पर लगाते हैं. इसका असर भारत के चुनिंदा सेक्टर्स पर भी पड़ सकता है. तो कौन-से वो खास प्रोडक्ट है जो भारत अमेरिका को बेचता है और इस पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगने से कितना असर पड़ेगा.

Trump Tariff Impact on India: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति जिसे “रेसिप्रोकल टैरिफ” नाम दिया गया है, ये अमेरिकी समय के अनुसार ये 2 अप्रैल से लागू होने वाला है. ट्रंप का ये ऐलान भारत के लिए मुसीबत बन सकता है. नए नियम के लागू होते ही अमेरिका भारतीय सामानों पर उतना ही टैरिफ लगाएगा जितना भारत अमेरिकी सामानों पर लगाता है. चूंकि भारत अमेरिका को दवाओं से लेकर रत्न-आभूषण, पेट्रोकेमिकल्स टेक्सटाइल्स, और ऑटोमोबाइल जैसे सेक्टर से जुड़े प्रोडक्ट बेचता है. अगर इन पर अमेरिका रेसिप्रोकल टैरिफ लगा देता है तो ऐसे प्रोडक्ट्स की कीमत बढ़ जाएंगी और वो यूएस मार्केट में टिक नहीं पाएंगे. इसका असर चुनिंदा सेक्टर्स पर सबसे ज्यादा पड़ेगा.
भारत पर क्या पड़ेगा असर?
एक्सपोर्ट होगा महंगा
भारत अमेरिका को लगभग 68,520 करोड़ रुपए का फार्मास्यूटिकल्स, 72,800 करोड़ रुपए के रत्न और आभूषण, 34,260 करोड़ रुपए के पेट्रोकेमिकल्स टेक्सटाइल्स, और ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़े प्रोडक्ट बेचता है. वर्तमान में अमेरिका ऐसे प्रोडक्ट्स पर औसतन 3% का टैरिफ लगा रहा है, लेकिन रेसिप्रोकल टैरिफ के लगने पर ये भारत की तर्ज पर इसे बढ़ाकर अगर 9.5% कर देता है तो एक्सपोर्ट महंगा हो जाएगा, जिससे भारतीय प्रोडक्ट्स की लागत बढ़ जाएगी. नतीजतन अमेरिका में ये महंगे हो जाएंगे, ऐसे में वहां के बाजार में भारतीय उत्पादों का टिकना मुश्किल होगा.
नुकसान की आशंका
स्टैंडर्ड चार्टर्ड के अनुमान के मुताबिक अमेरिका के रैसिप्रोकल टैरिफ के तहत 10% बढ़ोतरी से भारत के निर्यात में 11-12% की गिरावट हो सकती है, वहीं सिटी रिसर्च का मानना है कि टैरिफ बढ़ने से भारत को सालाना 7 बिलियन डॉलर यानी करीब 61 हजार करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है.
ट्रेड सरप्लस होगा कम
अमेरिका अभी भारतीय सामान पर कम टैरिफ लगाता है, जिससे भारत को ट्रेड सरप्लस का फायदा मिलता है, लेकिन रेसिप्रोकल टैरिफ लगने के बाद भारत को इसका कम फायदा मिलेगा.
इंपोर्ट बढ़ने से रुपया होगा कमजोर
अमेरिका के ज्यादा टैरिफ से बचने के लिए अगर भारत भी अमेरिकी सामानों पर टैरिफ कम करता है तो यूएस प्रोडक्ट भारत में सस्ते हो जाएंगे, इससे इन सामानों का इंपोर्ट बढ़ सकता है, लेकिन ज्यादा इंपोर्ट बढ़ने से डॉलर मजबूत होगा, जबकि रुपया कमजोर हो जाएगा.
इन सेक्टर्स पर भी पड़ेगी मार
यूएस टैरिफ लगने से भारत के ऑटो से लेकर कृषि तक के एक्सपोर्ट सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे. विशेषज्ञों का मानना है कि रेसिप्रोकल टैरिफ लगाए जाने से भारत को हर साल लगभग 7 बिलियन डॉलर का नुकसान हो सकता है.
यह भी पढ़ें: ट्रंप टैरिफ से निपटने के लिए भारत ने बनाया प्लान ‘ABC’, जानें किस बात का है डर
अमेरिका को बेचे जाने वाले टॉप 5 प्रोडक्ट
- पेट्रोलियम
- दवाइयां
- टेलीकॉम इंस्ट्रूमेंट
- मोती और महंगे पत्थर
- इलेक्ट्रिक मशीनरी और उपकरण
अमेरिका से आयात होने वाले टॉप 5 प्रोडक्ट
- पेट्रोलियम क्रूड
- पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स
- गोल्ड
- इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट
- कोयला
क्या होता है रेसिप्रोकल टैरिफ?
रेसिप्रोकल टैरिफ यानी जैसे को तैसा. इसका मतलब है कि जितना टैरिफ दूसरे देश अमेरिकी सामान पर लगाते हैं उतना ही टैरिफ वो दूसरे देश के सामानों पर भी लगाएंगे. उदाहरण के तौर पर अगर भारत यूएस के प्रोडक्ट पर 100 फीसदी टैरिफ लगाता है तो अमेरिका भी भारतीय प्रोडक्ट पर उतना ही टैरिफ लगाएगा.
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