वंदे भारत स्लीपर ट्रेन प्रोजेक्ट में देरी से RVNL को बड़ा नुकसान, डिजाइन में बदलाव को लेकर अटक गई बात

RVNL: काइनेट रेलवे सॉल्यूशंस रेल विकास निगम (RVNL) और ट्रांसमाशहोल्डिंग (TMH) के बीच एक ज्वाइंट वेंचर है. जून-जुलाई 2024 में रेलवे ने डिजाइन में बदलाव की मांग की थी. शुरुआती योजनाओं के तहत ज्वाइंट वेंचर को 120 ट्रेनसेट बनाने थे.

आरवीएनल को क्यों हुआ नुकसान. Image Credit: Money9live

RVNL: भारतीय रेलवे के इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और मेंटेनेंस का काम संभालने वाली रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) को बड़ा नुकसान झेलना पड़ा है. वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों और संबंधित कोच कॉन्फिगरेशन के मैन्युफैक्चरिंग के लिए काइनेट रेलवे सिस्टम्स के साथ भारत-रूस ज्वाइंट वेंचर में देरी हुई है, जिससे RVNL को अनुमानित 76 करोड़ का नुकसान पहुंचा है. रेलवे CPSE इस प्रोजक्ट को एग्जीक्यूट कर रही है. इस देरी के चलते अब डिजाइन के 2026 की पहली छमाही में ही आने की उम्मीद है. जबकि मैन्युफैक्चरिंग बाद के फेज में शुरू होगा.

काइनेट रेलवे और ट्रांसमाशहोल्डिंग

काइनेट रेलवे सॉल्यूशंस रेल विकास निगम (RVNL) और ट्रांसमाशहोल्डिंग (TMH) के बीच एक ज्वाइंट वेंचर है. यह वंदे भारत ट्रेनों समेत इलेक्ट्रिक पैसेंजर ट्रेनों की मैन्युफैक्चरिंग और मेंटेनेंस करता है. रूस में लोकोमोटिव और रेल उपकरण की सबसे बड़ी मैन्युफैक्चरर TMH, ग्लोबल लेवल पर नए रोलिंग स्टॉक के पांच सबसे बड़े निर्माताओं में से एक है.

ज्वाइंट वेंचर के तहत क्या है काम

RVNL ने काइनेट को सब्सिडियरी कंपनी के रूप में लिस्ट किया है. बिजनेस लाइन में छपी खबर के अनुसार, शुरुआती योजनाओं के तहत ज्वाइंट वेंचर को 120 ट्रेनसेट बनाने थे, जिनमें से प्रत्येक में 16 कोच होंगे, पहला प्रोटोटाइप 2025 में आने की उम्मीद है और 35 साल का मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट होगा. कॉन्ट्रैक्ट 6.5 अरब डॉलर का था. प्रत्येक ट्रेनसेट का निर्माण 120 करोड़ रुपये में किया जाना था, जिसमें कीमत में 2-4 फीसदी का अंतर शामिल था.

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कहां अटक गई है बात?

जून-जुलाई 2024 में रेलवे ने डिजाइन में बदलाव की मांग की थी और फिर कॉन्ट्रैक्ट को 24 कोचों वाली 80 ट्रेनों में बदल दिया गया. इसके पीछे का तर्क यह था कि शुरुआती कॉन्ट्रैक्ट संख्या को बरकरार रखते हुए सभी 1,920 कोचों का निर्माण किया जाएगा. सूत्रों ने कहा कि शौचालय और पेंट्री कार की मांग भारतीय रेलवे और रूसी रोलिंग स्टॉक निर्माता ट्रांसमैशहोल्डिंग के लिए एक अड़चन बन गई है, जिसकी वजह से प्रोडक्ट में संभावित रूप से देरी हुई है.

जुलाई से दिसंबर के बीच भारतीय रेलवे ने डिजाइन को मंजूरी नहीं दी थी. इस प्रक्रिया में प्रोजेक्ट के शुरू नहीं होने के चलते RVNL को 76 करोड़ रुपये का नोशनल लॉस हुआ है. रिपोर्ट के अनुसार, निवेशक कॉल में RVNL के शीर्ष अधिकारियों ने इस तथ्य की पुष्टि की.

कमजोर रहे तिमाही के नतीजे

RVNL के वित्त वर्ष 25 की तीसरी तिमाही के नतीजे भी काफी कमजोर रहे हैं. इस वजह से कंपनी का स्टॉक में भारी गिरावट आई है. हालांकि, कंपनी के ऑर्डर बुक को देखें, तो यह काफी मजबूत है. कंपनी के पास 97,000 करोड़ रुपये का ऑर्डर बुक है. आईडीबीआई कैपिटल ने इस स्टॉक पर ‘सेल’ की सलाह दी है और टार्गेट प्राइस 325 कर दिया है. RVNL के शेयर बीते दिन लाल निशान में 361.35 रुपये पर क्लोज हुए थे.