न्यायिक कार्य से अलग हुए जस्टिस यशवंत वर्मा, दिल्ली हाई कोर्ट ने जारी किया सर्कुलर

कैस कांड में फंसे जस्टिस यशवंत वर्मा को बड़ा झटका लगा है. उन्हें सभी न्यायिक कार्यों से अगले आदेश तक के लिए अलग कर दिया गया है. इस बाबत दिल्ली हाई कोर्ट ने सर्कुलर भी जारी किया है. जानें आखिर क्या है पूरा मामल.

जस्टिस यशवंत वर्मा का हुआ ट्रांसफर Image Credit: @Tv9

Justice Yashwant Varma Judicial Work: दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस DK Upadhyay ने जस्टिस यशवंत वर्मा को तुरंत प्रभाव से सभी न्यायिक कार्यों से हटा दिया है. यह कदम शनिवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की ओर से जांच समिति गठित करने की सिफारिश के बाद उठाया गया. गठित की गई इस तीन सदस्यीय जांच समिति का मुख्य उद्देश्य जस्टिस वर्मा के घर में बड़ी मात्रा में मिले कैश के बाद उनके खिलाफ की जा रही जांच पर नजर रखना है. सोमवार को जारी किए गए एक परिपत्र में कहा गया कि हाल की घटना के मद्देनजर यशवंत वर्मा से न्यायिक कार्य अगले आदेश तक तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाता है.

मिले कैश के ढेर

कुछ दिन पहले दिल्ली के तुगलक रोड स्थित न्यायमूर्ति वर्मा के आधिकारिक निवास पर एक आग लग गई थी जिसके बाद मौके पर पहुंची. दिल्ली फायर सर्विस और पुलिस को घर के स्टोर रूम में कैश की ढेरों गड्डियां मिली. इस घटना के बाद से जस्टिस वर्मा को न्यायिक कार्य से हटा दिया गया. इसके बाद हाई कोर्ट ने न्यायमूर्ति वर्मा ओर से की जा रही सुनवाई के मामलों को जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और हरीश वैद्यनाथन शंकर की बेंच को सौंप दिया है. यह निर्णय न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ जांच के कारण लिया गया. इस मामले के कारण न्यायिक समुदाय में भी बहस हो रही है और संसद में भी इस पर चर्चा की जा रही है.

क्या है पूरा मामला?

इस पूरे मामले की शुरुआत 14 मार्च की रात करीब 11:35 PM बजे तुगलक रोड पर जस्टिस वर्मा के आधिकारिक आवास में आग लगने के बाद हुई. दिल्ली फायर सर्विस ने तुरंत कार्रवाई की और कुछ ही मिनटों में आग को बुझा दिया. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान जस्टिस वर्मा शहर से बाहर थे. इसी बीच वर्मा के घर के बाहर जले हुए नोटों के बंडल की तस्वीर भी सामने आई.