100 सालों तक सुरक्षित है तमिलनाडु का नया पंबन ब्रिज, RVNL ने साझा की जानकारी, पीएम मोदी करेंगे उद्घाटन
रविवार, 6 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु के रामेश्वरम में बन कर तैयार हुए नए पंबन ब्रिज का उद्घाटन करेंगे. यह भारत का पहला वर्टिकल लिफ्ट ब्रिज है. इसको अगले 100 सालों तक सुरक्षित घोषित कर दिया गया है. जानें इसके बारे में.

Pamban Bridge Safe for 100 Years: तमिलनाडु के रामेश्वरम में नया पंबन ब्रिज बन कर तैयार हो चुका है. यह भारत का पहला वर्टिकल लिफ्ट ब्रिज है. रविवार यानी 6 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका उद्घाटन करेंगे. नए ब्रिज के सुरक्षा को लेकर बड़ा दावा किया है. पंबन ब्रिज को लेकर कहा गया है कि इसपर 80 किलोमीटर प्रति घंटा के रफ्तार से ट्रेन चलाई जाती है जो अगले 100 वर्षों तक सुरक्षित रहने वाला है. पुल को लेकर यह दावा ब्रिज को बनाने का काम करने वाली पब्लिक सेक्टर की कंपनी रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) के डायरेक्टर एमपी सिंह ने किया है.
“100 साल तक कोई चिंता नहीं”
इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस ब्रिज के सेफ्टी पॉइन्ट पर विचार करने के लिए पिछले नवंबर में गठित पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति में से एक एमपी सिंह भी हैं. उन्होंने कहा कि इस आइकोनिक स्ट्रक्चर के हर हिस्से की जांच को काफी सावधानी के साथ किया गया है. सिंह ने कहा, “ब्रिज को लेकर कमेटी का मानना है कि 80 किलोमीटर की रफ्तार से 100 साल तक ट्रेन को बिना किसी चिंता के चलाया जा सकता है.”
हालांकि इससे पहले, जनवरी में साउथ रेलवे की ओर से साझा किए गए एक डाक्यूमेंट में कहा गया था कि पुल के साथ बने हुए जंग से लड़ने वाले सिस्टम को बगैर किसी मेंटेनेंस के 38 साल तक सुरक्षित रखा जा सकता है वहीं न्यूनतम रखरखाव के साथ ब्रिज की लाइफ 58 साल तक बढ़ सकती है. मालूम हो कि इस पुल की प्लानिंग, डिजाइनिंग, निर्माण और कमीशनिंग की पूरी जिम्मेदारी RVNL की थी.
क्यों है 80 किलोमीटर प्रति घंटे का लिमिट?
हालांकि यह पुल इतना मजबूत है कि इस पर 160 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से ट्रेन चल सकती है लेकिन रामेश्वरम की तरफ इसका अलाइंमेंट थोड़ा घुमावदार है जिसके कारण इस पर चलने वाली ट्रेन की स्पीड लिमिट को सुरक्षा की नजर से 80 किलोमीटर प्रति घंटा कर दिया गया है. इससे इतर, सिंह ने बताया कि कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (CRS) की ओर से पुल के डिजाइन को लेकर उठाए गए सवालों के बाद दोबारा उसका निरीक्षण किया गया था.
पुल की सेफ्टी के लिए बनाया गया पैनल
नवंबर 2024 में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक हाई लेवल समिति बनाई थी. इसमें रेलवे बोर्ड (ब्रिज), रिचर्स डिजाइन और स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन (RDSO), साउदर्न रेलवे के चीफ पुल इंजीनियर, RVNL के निदेशक और IIT-रुड़की के एक बाहरी विशेषज्ञ के प्रमुख कार्यकारी निदेशक शामिल थे. पैनल को CRS की ओर से उठाए गए मुद्दों की समीक्षा करने के लिए कहा गया था जिसमें खराब जंग-रोधी कदम, सिग्निंग की गलतियों सहित कई दूसरे पॉइंट्स शामिल थे.
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