NSE के IPO में देरी से कई सरकारी कंपनियों को लग सकता है झटका, निवेशकों की लिस्ट में LIC और SBI तक

NSE IPO: NSE के शेयरधारक 2015 से एक्सचेंज को पब्लिक होने के लिए दबाव बना रहे हैं. एक्सचेंज ने कई बार आईपीओ के लिए आवेदन भी किया है, लेकिन सेबी ने हर बार लाल झंडी ही दिखाई है. एक बार फिर से ऐसा माना जा रहा है कि लंबे समय के लिए NSE का आईपीओ टल सकता है.

एनएसई के आईपीओ में अभी और हो सकती है देरी. Image Credit: Getty image

NSE IPO: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के इनिशियल पब्लिक ऑफर (IPO) में देरी से वे शेयर होल्डर प्रभावित हो सकते हैं, जो एक दशक से अधिक समय से इस एक्सचेंज में निवेश कर रहे हैं. वे अपनी हिस्सेदारी कम करना चाहते हैं. अधिकांश शेयरधारक सरकारी कंपनियां हैं, जिनमें एलआईसी (10.7 प्रतिशत), एसबीआई (3.23 प्रतिशत), एसबीआई कैप्स (4.33 प्रतिशत), स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (4.4 प्रतिशत) और चार पब्लिक सेक्टर की इंश्योरेंस कंपनियां (6.8 फीसदी) शामिल हैं.

दो साल की देरी

अरंडा इन्वेस्टमेंट्स (मॉरीशस), पीआई ऑपर्च्युनिटीज फंड और एमएस स्ट्रेटेजिक (मॉरीशस) जैसी निजी इक्विटी कंपनियां भी एक दशक से अधिक समय से निवेशकों की लिस्ट मे हैं. रिपोर्टों के अनुसार, एनएसई को अपना आईपीओ लॉन्च करने में दो साल तक की संभावित देरी का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि सेबी ने कुछ कमियों को उजागर किया है. बाजार नियामक ने एक्सचेंज को सलाह दी है कि जब तक चिंताएं दूर नहीं हो जातीं, वह IPO प्रक्रिया को रोक दे.

बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, सभी सरकारी स्वामित्व वाले शेयरधारक आईपीओ के जरिए अपना शेयर बेचना चाहते हैं या फिर पूरी तरह से बाहर निकलना नहीं चाहते हैं.

निवेशकों ने कम की है हिस्सेदारी

कई प्रमुख शेयरधारकों ने आईपीओ में देरी के कारण अपनी हिस्सेदारी कम कर दी है. जनरल अटलांटिक, एनवाईएसई ग्रुप, एलिवेशन कैपिटल और गोल्डमैन सैक्स ने 2007 में एनएसई में 5 फीसदी हिस्सेदारी हासिल करने वाले विदेशी निवेशकों के पहले समूह में शामिल थे. उसी साल, मॉर्गन स्टेनली, सिटीग्रुप और एक्टिस ने एक्सचेंज में क्रमश 3 फीसदी, 2 फीसदी और 1 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी.

सिटीग्रुप, गोल्डमैन सैक्स और नॉरवेस्ट वेंचर पार्टनर्स ने वित्त वर्ष 22 में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेच दी. एलिवेशन कैपिटल ने वित्त वर्ष 24 में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेच दी, जो SAIF II SE इन्वेस्टमेंट मॉरीशस के जरिए रखी गई थी.

पब्लिक होने का दबाव

सेबी के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने सोमवार को कहा कि नियामक एनएसई आईपीओ में देरी करने वाले मुद्दों की जांच करेगा. बोर्ड मीटिंग के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हम इस पर गौर करेंगे. हम इस पर विचार करेंगे कि यह कैसा है और इसे कैसे आगे बढ़ाया जाए. NSE के शेयरधारक 2015 से एक्सचेंज को पब्लिक होने के लिए दबाव बना रहे हैं. एक्सचेंज ने दिसंबर 2016 में अपने आईपीओ के लिए आवेदन किया था, लेकिन को-लोकेशन घोटाले की जांच लंबित होने के कारण उसे अपने प्रस्ताव दस्तावेज वापस लेने के लिए कहा गया था.

NSE की वैल्यूएशन

वित्त वर्ष 21 में एक्सचेंज ने अपने आईपीओ योजना के लिए बाजार नियामक से मंजूरी मांगी, लेकिन उसे कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली. पिछले साल, NSE ने अपने प्रस्तावित आईपीओ के लिए ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट के लिए आवेदन किया था, जो सेबी के पास पेंडिंग है. एक्सिस बैंक के बरगंडी प्राइवेट और हुरुन इंडिया द्वारा संयुक्त रूप से जारी हालिया रिपोर्ट के अनुसार, एनएसई भारत की सबसे वैल्यूएबल नॉन-लिस्टेड प्राइवेट कंपनी है, जिसका वैल्यूएशन 4.7 लाख करोड़ है.

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