इस मूवी ने Indira IVF का बिगाड़ा IPO प्लान ! 3500 करोड़ का सपना टूटा, जानें फिल्म में ऐसा क्या है?
इंदिरा आईवीएफ का आईपीओ इस साल के सबसे बड़े हेल्थकेयर आईपीओ में से एक माना जा रहा था. लेकिन फिल्म और आईपीओ की टाइमिंग को लेकर उठे विवाद के कारण यह फिलहाल टल गया है. आइए जानते हैं कि ऐसा इसमें क्या है जो सेबी ने इस पर आपत्ति लगाई है.
Indira IVF Hospital IPO Postponed: साल 1988 में डॉ. अजय मुर्डिया ने राजस्थान के उदयपुर एक क्लिनिक से इंदिरा आईवीएफ की शुरुआत की थी. फिर हाल में ही एक मूवी आती है जिसका कनेक्शन इस आईपीओ से बताया जाता है. जिसके बाद कहानी में ट्विस्ट आता है जिससे 3,500 करोड़ का आईपीओ बैकफुट पर आ जाता है. दरअसल, फर्टिलिटी ट्रीटमेंट चेन Indira IVF का 3,500 करोड़ रुपये का IPO लाने का प्लान था. ET के मुताबिक, सेबी ने कंपनी से जुड़े हाल ही में रिलीज हुई फिल्म “तुमको मेरी कसम” को लेकर आपत्ति जताई है. सेबी को ऐसा लगता है कि यह फिल्म इस इस आईपीओ को इनडायरेक्टली प्रमोट कर रही है. अनुपम खेर ने इस फिल्म में लीड रोल प्ले किया है.
सेबी की आपत्ति और आईपीओ का टलना
इंदिरा आईवीएफ ने हाल ही में सेबी के पास अपना DRHP दाखिल किया था. लेकिन सेबी ने फिल्म की रिलीज और आईपीओ फाइलिंग के बीच के संबंधों पर सवाल उठाए. फिल्म, जो अजय मुर्डिया के जीवन पर आधारित है, इंदिरा आईवीएफ के संस्थापक की कहानी बताती है. इसे मुर्डिया के बेटों द्वारा बनाया गया है. अनुपम खेर डॉ अजय के किरदार में हैं इसके निर्देशक विक्रम भट्ट हैं.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सेबी को लगा कि फिल्म का उद्देश्य आईपीओ के प्रति निवेशकों की धारणा को प्रभावित करना हो सकता है. जिससे फेयर मार्केट प्रैक्टिस के सिद्धांतों का उल्लंघन हो सकता है. इस आपत्ति के बाद कंपनी को अपनी IPO फाइलिंग अस्थायी रूप से वापस लेनी पड़ी.
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फिल्म और कंपनी के बीच का संबंध
फिल्म “तुमको मेरी कसम” हाल ही में रिलीज़ हुई और इसे डॉ. अजय मुर्डिया की बायोपिक के तौर पर प्रचारित किया गया. फिल्म को एक बॉलीवुड मसाला स्टाइल में प्रस्तुत किया गया है, जिसमें ड्रामा, कोर्ट रूम सीक्वेंस और वीएफएक्स शामिल हैं. हालांकि, फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर कोई खास प्रतिक्रिया नहीं मिली. 12 करोड़ रुपये के बजट वाली इस फिल्म ने अब तक सिर्फ 54 लाख रुपये की कमाई की है.
इंदिरा आईवीएफ: भारत में फर्टिलिटी ट्रीटमेंट का बड़ा नाम
यह कंपनी 150 से अधिक केंद्रों और 330 विशेषज्ञों के साथ भारत की सबसे बड़ी फर्टिलिटी ट्रीटमेंट चेन बन चुकी है. पिछले वर्ष, ग्लोबल इन्वेस्टमेंट फर्म EQT ने इस कंपनी में एक महत्वपूर्ण हिस्सेदारी खरीदी थी.
एक क्लिनिक से हुई शुरुआत
साल 1988 में डॉ. अजय मुर्डिया ने राजस्थान के उदयपुर एक क्लिनिक से इंदिरा आईवीएफ की शुरुआत की थी. 2015 में यह एक कॉर्पोरेट कंपनी बनी. कंपनी का दावा है कि देशभर में 150 सेंटर्स के जरिये अब तक 1.60 लाख कपल को फर्टिलिटी ट्रीटमेंट दिया गया है.
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