35 साल से कम है उम्र तो इस फंड में लगाएं पैसे, 40 पार के लिए ये बेस्ट; धीरेंद्र कुमार का जानें निवेश मंत्र
वैल्यू रिसर्च के CEO धीरेंद्र कुमार ने Money9 के साथ एक पॉडकास्ट में कहा कि, निवेश का सफर आसान नहीं है, लेकिन यह आदत बनने पर लंबी अवधि में जबरदस्त फायदा देता है. 250 रुपये की SIP को बहुत बड़ा कमदम नहीं है लेकिन ये निवेश की आदत सुधार सकता है. यहां जानें उन्होंने क्या-क्या टिप्स दी हैं...

Investment, SIP: निवेश करना आसान नहीं है. ये बात सही है. निवेश का मतलब ये नहीं कि आपने कहीं पैसा लगा दिया और काम हो गया बल्कि ये अनुशासन और धैर्य के साथ करने वाली प्रक्रिया है. आज जहां 250 रुपये की SIP जैसी छोटी शुरुआतें निवेश को आसान बना रही हैं, वहीं भारतीय निवेशकों की मानसिक बाधाएं (जैसे बाजार के उतार-चढ़ाव में घबराहट या खर्चे पर नियंत्रण की कमी) अभी भी बड़ी चुनौती हैं. तो कैसे छोटी बचत, लॉन्ग टर्म की रणनीति और मन मारकर निवेश करने की आदत भविष्य के लिए मजबूत वित्तीय आधार बना सकती है. चलिए जानते हैं क्या कहते हैं फाइनेंशियल एक्सपर्ट और वैल्यू रिसर्च के सीईओ धीरेंद्र कुमार.
निवेश करना आसान नहीं: धीरेंद्र कुमार ने क्यों दी चेतावनी?
आज के दौर में निवेश को लेकर लोगों की रुचि बढ़ रही है, लेकिन यह इतना सरल भी नहीं है. धीरेंद्र कुमार का कहना है कि निवेश सिर्फ पैसे लगाने की बात नहीं, बल्कि एक अनुशासन और आदत बनाने का विषय है.
250 की SIP: बदलाव की दिशा में कदम
बाजार में 100 की माइक्रो SIP पहले से मौजूद थी, लेकिन इसे ज्यादा बढ़ावा नहीं मिला. अब 250 की SIP को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे छोटे निवेशकों को एक एक्सेस मिल सके. हालांकि, इस बदलाव से कोई क्रांतिकारी परिवर्तन नहीं आएगा, लेकिन यह निवेश करने की आदत बनाने में मददगार हो सकता है.
धीरेंद्र कुमार के अनुसार, बचपन में स्कूल सेविंग स्कीम जैसी योजनाएं होती थीं, जहां थोड़ा-थोड़ा पैसे जमा कर बच्चों को बचत की आदत डलवाई जाती थी. ठीक उसी तरह, 250 की SIP छोटे निवेशकों को धीरे-धीरे वेल्थ बनाने में मदद कर सकती है. खासतौर पर उन लोगों के लिए, जिनकी इनकम सीमित है, यह राशि भविष्य में एक महत्वपूर्ण आर्थिक सहारा बन सकती है.
भारत में निवेश की बदलती तस्वीर
आज हर किसी के पास स्मार्टफोन और UPI जैसी डिजिटल सुविधाएं हैं, जिससे वित्तीय सेवाओं तक पहुंच आसान हुई है. भारतीयों में बचत की प्रवृत्ति तो है, लेकिन निवेश की नहीं. यही कारण है कि जनधन योजना जैसे कदमों से बैंकिंग की पहुंच बढ़ाई गई और अब इसे निवेश से जोड़ने की कोशिश हो रही है.
धीरेंद्र कुमार का मानना है कि आने वाले 5-10 सालों में यह निवेश करने की आदत व्यापक रूप से विकसित हो सकती है, जहां किसी को निवेश के फायदे समझाने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
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क्या अभी निवेश करना चाहिए?
अगर कोई नया निवेशक बाजार में प्रवेश करना चाहता है, तो सबसे पहले उसे यह समझना होगा कि निवेश का सबसे अच्छा समय “20 साल पहले” था, और दूसरा सबसे अच्छा समय “अभी” है.
यदि कोई युवा निवेशक है, जिसकी उम्र 35-40 वर्ष से कम है, तो उसे मल्टीकैप या फ्लेक्सीकैप फंड में निवेश करना चाहिए. वहीं, अगर कोई 40 वर्ष से अधिक उम्र का नया निवेशक है, तो उसके लिए एग्रेसिव हाइब्रिड फंड या बैलेंस फंड बेहतर विकल्प हो सकते हैं.
इसका कारण यह है कि उम्र बढ़ने के साथ निवेशकों की जोखिम सहने की क्षमता कम हो जाती है. यदि बाजार में उतार-चढ़ाव आता है, तो नए निवेशक घबरा जाते हैं और जल्दी पैसा निकालने का फैसला करते हैं, जिससे उन्हें नुकसान होता है. हाइब्रिड फंड में 25% हिस्सा फिक्स्ड इनकम में होता है, जिससे बाजार गिरने पर भी नुकसान कम होता है.
निवेश को लेकर बदलनी चाहिए मानसिकता
इतिहास गवाह है कि 1990 से पहले भारतीय शेयर बाजार सीमित लोगों के लिए था और पारदर्शिता की कमी थी. धीरे-धीरे SEBI के आने और डीमैट अकाउंट जैसी सुविधाओं के कारण बाजार में सुधार हुआ. लेकिन निवेश की मानसिकता को बदलने में समय लगा.
कई निवेशक बाजार के उछाल में पैसा लगाते हैं और गिरावट के समय घबरा कर निकल जाते हैं. यही कारण है कि लंबी अवधि के निवेश की मानसिकता विकसित करना जरूरी है. धीरेंद्र कुमार का कहना है कि किसी भी खराब म्यूचुअल फंड में भी अगर कोई व्यक्ति 5 साल तक निवेश करता है, तो उसे फिक्स्ड इनकम से अधिक रिटर्न मिल सकता है.
“मन मारना” क्यों जरूरी है?
निवेश आसान नहीं है क्योंकि यह एक मनोवैज्ञानिक चुनौती भी है. आज के समय में कंज्यूमर कल्चर इतना बढ़ गया है कि लोगों को बचत और निवेश करने से ज्यादा खर्च करने की प्रेरणा दी जाती है. क्रेडिट कार्ड और आसान EMI सुविधाएं लोगों को उनके भविष्य की आमदनी पहले ही खर्च करने के लिए प्रेरित करती हैं.
धीरेंद्र कुमार के अनुसार, निवेश का सबसे बड़ा नियम है – “आज के खर्च को टालना और भविष्य के लिए बचत करना”. यह वही लोग कर सकते हैं, जो धैर्य रखते हैं. इसलिए मन को मारना जरूरी है. अगर कुछ खरीदने का मन कर रहा है तो थोड़ा मन को मारिए और उस पैसे को निवेश करें.
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