क्या माता-पिता बेटे को अपनी संपत्ति से कर सकते हैं बेदखल? जानें- क्या कहता है कानून
Property Rule: अदालत को माता-पिता द्वारा दायर एक मुकदमे की सुनवाई का काम सौंपा गया था, जिसमें वे अपने बेटे को घर से बेदखल करने की मांग कर रहे थे. सीनियर सिटीजन अपने बच्चों या रिश्तेदारों (कानूनी उत्तराधिकारियों) के खिलाफ भरण-पोषण के लिए मुकदमा दायर कर सकते हैं.
Property Rule: अगर कोई सीनियर सिटीजन अपने बेटे को अपनी संपत्ति से बेदखल करने के लिए मुकदमा दायर कर दें, तो क्या यह संभव है कि कोर्ट इसकी मंजूरी दे दे. हाल ही में एक ऐसा ही मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने आया. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (28 मार्च) को एक बुजुर्ग दंपत्ति द्वारा अपने बेटे को घर से बेदखल करने के लिए दायर मुकदमे को खारिज कर दिया.
दरअसल, अदालत को माता-पिता द्वारा दायर एक मुकदमे की सुनवाई का काम सौंपा गया था, जिसमें वे अपने बेटे को घर से बेदखल करने की मांग कर रहे थे. उनका दावा था कि उसने उनकी देखभाल करने में लापरवाही बरती है और उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (28 मार्च) को एक बुजुर्ग दंपत्ति द्वारा अपने बेटे को घर से बेदखल करने के लिए दायर मुकदमे को खारिज कर दिया.
क्या था मामला?
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2019 में सीनियर सिटीजन अधिनियम के तहत एक ट्रिब्यूनल ने माता-पिता को सीमित राहत दी थी, जिसमें बेटे को अपने माता-पिता की अनुमति के बिना घर के किसी भी हिस्से पर अतिक्रमण नहीं करने का आदेश दिया गया था. उसे उसी इमारत में बर्तन की दुकान चलाने और उस कमरे तक सीमित रखा गया, जहां वह अपनी पत्नी और बच्चों के साथ रहता है. ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा था कि बेदखली की कार्यवाही तभी फिर से शुरू की जा सकती है, जब बेटा अपने माता-पिता के साथ और दुर्व्यवहार करे या उन्हें प्रताड़ित करे.
क्यों खारिज हुआ मामला?
अब समझ लेते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को किस आधार पर खारिज किया. दरअसल, कोर्ट ने माता-पिता और सीनियर सिटीजन के भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007 (वरिष्ठ नागरिक अधिनियम) का हवाला दिया. यह अधिनियम वरिष्ठ माता-पिता के लिए अपने बच्चों से भरण-पोषण की मांग करते हुए मुकदमा दायर करने का् अधिकार देता है. हालांकि, यह अधिनियम साफ तौर पर माता-पिता को अपने बच्चों या रिश्तेदारों को अपने घर से बेदखल करने का अधिकार नहीं देता है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने प्रॉपर्टी ट्रांसफर से संबंधित प्रावधान की व्याख्या कुछ परिस्थितियों में ऐसे बेदखली आदेशों की अनुमति देने के लिए की है.
सीनियर सिटीजन के अधिकार
सीनियर सिटीजन एक्ट उन माता-पिता (60 वर्ष या उससे अधिक आयु के) को अनुमति देता है जो अपनी कमाई या अपनी संपत्ति से अपना भरण-पोषण नहीं कर सकते. इस स्थिति में वे अपने बच्चों या रिश्तेदारों (कानूनी उत्तराधिकारियों) के खिलाफ भरण-पोषण के लिए मुकदमा दायर कर सकते हैं.
यह बच्चों या रिश्तेदारों पर माता-पिता की जरूरतों को पूरा करने की जिम्मेदारी तय करता है, ताकी बुजुर्ग माता-पिता सामान्य रूप से जीवनयापन कर सकें. अधिनियम इन मुकदमों की सुनवाई के लिए ट्रिब्यूनल स्थापित करने का अधिकार देता है. इसके अलावा पारित किसी भी आदेश को चुनौती देने के लिए अपीलीय ट्रिब्यूनल भी बनाया जा सकता है.
संपत्ति ट्रांसफर या गिफ्ट में देने की शर्त
सबसे अहम बात यह है कि अधिनियम की धारा 23 माता-पिता को अपनी संपत्ति ट्रांसफर या उपहार में देने के बाद भी भरण-पोषण प्राप्त करने का अवसर देती है. धारा 23(1) के तहत एक सीनियर सिटीजन अपनी संपत्ति को शर्त के साथ गिफ्ट में दे सकता है या ट्रांसफर कर सकता है. शर्त सीनियर सिटीजन की देखभाल-भरण-पोषण प्रदान करने की होगी.
अगर यह शर्त पूरी नहीं होती है, तो प्रावधान में कहा गया है कि ट्रांसफर धोखाधड़ी या जबरदस्ती या अनुचित प्रभाव के तहत किया गया माना जाएगा. अगर सीनियर सिटीजन ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाता है तो इसे शून्य घोषित किया जा सकता है. धारा 23(2) सीनियर सिटीजन को संपत्ति से भरण-पोषण प्राप्त करने का अधिकार है.