सरकार ने TDS-TCS के ड्रॉफ्ट को पूरी तरह बदला, जानें नए नियम आपको कैसे करेंगे प्रभावित

सरकार ने संसद में इनकम टैक्स बिल 2025 पेश किया है, जिसमें TDS और TCS के नियमों में बड़े बदलाव किए गए हैं. ये नए प्रावधान टैक्सपेयर्स, निवेशकों और कारोबारियों को सीधे प्रभावित करेंगे. जानिए, ये बदलाव आपके लिए कितने फायदेमंद या नुकसानदायक होंगे.

आसान हुआ TDS-TCS नियम! Image Credit: FreePik

TCS-TDS Rule Change: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में इनकम टैक्स बिल 2025 पेश किया है, जिसमें टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (TDS) और टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (TCS) से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित किए गए. इस बिल का उद्देश्य टैक्स कटौती और कलेक्शन प्रोसेस को सरल बनाना है, जिससे आम करदाताओं, व्यवसायों और टैक्स प्रोफेसनल्स के लिए अनुपालन (compliance) आसान हो जाए. वर्तमान में टीडीएस और टीसीएस की कई जटिल धाराएं हैं, जिनकी वजह से करदाताओं को विभिन्न दरों और कटौती नियमों को समझने में कठिनाई होती है. लेकिन इस नए बिल में इन सभी प्रावधानों को एक संरचित और सरल रूप में प्रस्तुत किया गया है ताकि करदाता आसानी से समझ सकें कि किन लेनदेन पर कितना टैक्स कटेगा या वसूला जाएगा.

टीडीएस और टीसीएस क्या होता है?

टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (TDS)

यह टैक्स होता है जो किसी व्यक्ति को पेमेंट करने से पहले ही काट लिया जाता है. इसका मकसद सरकार को एडवांस टैक्स कलेक्शन सुनिश्चित करना है ताकि बाद में टैक्स चोरी की संभावना कम हो.

उदाहरण के तौर पर ऐसे समझे कि अगर किसी बैंक से आपको एफडी पर 10,000 रुपये का ब्याज मिलता है, तो बैंक 10 फीसदी टीडीएस काटकर 1,000 रुपये सरकार को जमा कर देगा और आपको 9,000 रुपये का भुगतान करेगा. बाद में जब आप अपना आईटीआर (ITR) दाखिल करेंगे तो यह 1,000 रुपये पहले से जमा दिखेगा और आपकी टैक्स देनदारी में समायोजित कर दिया जाएगा. टीडीएस आमतौर पर वेतन, प्रोफेशनल फीस, किराया, ब्याज आय, कमीशन और अनुबंधों पर लागू होता है.

टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (TCS)

टीसीएस ठीक टीडीएस के उलट काम करता है. इसमें भुगतान करने वाले की जगह विक्रेता ही टैक्स क्लेक्ट करता है और सरकार को जमा करता है.

उदाहरण के तौर पर ऐसे समझे कि अगर आप 12 लाख रुपये की कार खरीदते हैं तो कार डीलर 1 फीसदी टीसीएस (12,000 रुपये) आपसे लेगा और इसे सरकार के खाते में जमा करेगा. टीसीएस कुछ खास लेनदेन पर लागू होता है जैसे कि मोटर वाहन, खनिज, शराब, स्क्रैप, विदेशी रेमिटेंस और कुछ अन्य बिक्री.

इनकम टैक्स बिल 2025 के तहत टीडीएस/टीसीएस में क्या बदलाव हुए हैं?

पहले टीडीएस से जुड़े प्रावधान 43 अलग-अलग धाराओं में बंटे थे जिनमें कटौती की अलग-अलग दरें, सीमा और अन्य नियम शामिल थे. अब इन सभी को एक ही सेक्शन 393 में समाहित कर दिया गया है.

इसके तहत तीन अलग-अलग टेबल बनाए गए हैं:

  • निवासियों के लिए
  • अनिवासियों के लिए
  • सभी व्यक्तियों के लिए

सभी कैटेगरी में इन सवालों का टेबल होता है:

  • भुगतान का प्रकार
  • न्यूनतम सीमा
  • भुगतान करने वाला व्यक्ति
  • लागू टीडीएस दर

नए नियमों के तहत क्या होगा?

समान प्रकृति की इनकम को एक साथ समूहित किया गया है जैसे कि कमीशन, किराया, ब्याज और शेयर बाजर से हुई इनकम. इसके साथ ही नए नियम में उन मामलों की एक अलग तालिका बनाई गई है, जिनमें टीडीएस लागू नहीं होगा.

टीसीएस के प्रावधान भी धारा 394 में समेकित किए गए हैं, जिसमें सभी टीसीएस लागू होने वाले लेनदेन, न्यूनतम सीमा, संग्रहकर्ता (Collector) और टीसीएस दरें शामिल हैं. इसके अलावा, कुछ प्रावधानों को और स्पष्टता देने के लिए अलग-अलग अनुभागों में विभाजित किया गया है, जैसे कि:

  • लोअर टीडीएस/टीसीएस सर्टिफिकेट प्राप्त करने की प्रक्रिया
  • अनुपालन और रिपोर्टिंग
  • टीडीएस/टीसीएस न काटने या जमा न करने पर पेनाल्टी
  • स्टेटमेंट दाखिल करने के नियम

टीडीएस/टीसीएस नियमों को कैसे आसान किया गया है?

सरकार ने नियमों की संख्या और शब्दों को कम कर इन्हें आसान बना दिया है:

  • पहले टीडीएस/टीसीएस के लिए 69 अलग-अलग धाराएं थीं, अब इन्हें 13 धाराओं में समेट दिया गया है.
  • पहले इन धाराओं की शब्द संख्या 27,452 थी, अब इसे घटाकर 14,675 शब्द कर दिया गया है.

इसका मतलब यह है कि अब करदाताओं को कम जटिलता का सामना करना पड़ेगा और वे आसानी से अनुपालन कर सकेंगे.

नई टीडीएस/टीसीएस दरें

हालांकि टीडीएस और टीसीएस की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है लेकिन इनके प्रावधान को सरल बना दिया गया है.

मुख्य टीडीएस दरें:

  • वेतन – आयकर स्लैब के अनुसार
  • ब्याज आय – 10%
  • किराया (₹2.4 लाख से अधिक) – 10%
  • प्रोफेशनल फीस (₹30,000 से अधिक) – 10%
  • कमीशन (₹15,000 से अधिक) – 5%

मुख्य टीसीएस दरें:

  • ₹10 लाख से ऊपर की गाड़ी खरीदने पर – 1%
  • ₹7 लाख से अधिक विदेशी रेमिटेंस पर – 5%
  • खनिज, शराब, स्क्रैप की बिक्री पर – 1%-5%

कंप्लायंस नियमों का मानकीकरण

पहले टीडीएस और टीसीएस के लिए अलग-अलग पेनल्टी, रिफंड और छूट के नियम थे लेकिन अब इन सभी को एक समान कर दिया गया है.

  • लोअर टीडीएस/टीसीएस सर्टिफिकेट अब एक ही प्रोसेस के तहत मिलेगा.
  • टीडीएस/टीसीएस न काटने पर 1% मासिक ब्याज देना होगा.
  • लेट फाइलिंग पर जुर्माना और मुकदमेबाजी की संभावना होगी.

इन बदलाव के क्या मायने हैं?

नए टैक्स नियम बदलने से लोगों को अब अलग-अलग धाराओं को समझने की जरूरत नहीं होगी. साथ ही व्यवसायों और करदाताओं को कम दस्तावेजी प्रक्रिया का सामना करना पड़ेगा. टैक्स अनुपालन पहले से अधिक सरल और तेज हो जाएगा.

किन करदाताओं पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

नौकरीपेशा के लिए:

  • वेतन पर लागू होने वाले टीडीएस कटौती में कोई नया बदलाव नहीं किया गया है.
  • ITR दाखिल करना पहले से आसान होगा.

बिजनेस और प्रोफेशनल्स के लिए:

  • कम कागजी कार्रवाई, क्योंकि अब टीडीएस की कई धाराओं को नहीं खंगालना पड़ेगा.
  • एक ही नियम के तहत पेनाल्टी, डिस्काउंट और रिफंड का प्रावधान किया गया है.
  • टीडीएस और टीसीएस का एक स्ट्रक्चर में होना टैक्स पेमेंट को सुगम बनाएगा.

निवेशकों और करदाताओं के लिए:

  • ब्याज, किराया और पेशेवर शुल्क पर पुरानी टीडीएस दरें लागू रहेंगी.
  • टीडीएस/टीसीएस समझना और फाइलिंग करना पहले से आसान होगा.

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सरल और पारदर्शी टैक्स नियम

इनकम टैक्स बिल 2025 ने टीडीएस और टीसीएस नियमों को सरल और स्पष्ट बना दिया है. अब करदाताओं को अनेक जटिल धाराओं में उलझने की जरूरत नहीं होगी. वेतनभोगियों, व्यवसायों, निवेशकों और पेशेवरों के लिए यह नया ढांचा आसानी से समझने वाले फॉर्मेट में होगा.

जबकि टैक्स दरों में बदलाव नहीं हुआ है लेकिन क्योंकि नए नियम के तहत कन्फुजन कम करने की कोशिश हुई है और साथ ही कागजी कार्रवाईयों को भी सीमित किया गया है, तो ऐसे में टैक्स भरना आसान होगा.