वित्त सचिव नागराजू बोले, यूनिफाइड पेंशन स्कीम का होगा विस्तार, जानें कौन-कौन उठा पाएगा फायदा?

केंद्रीय वित्त सेवा सचिव एम नागराजू का कहना है कि यूनिफाइड पेंशन स्कीम का विस्तार केंद्रीय कर्मचारियों के अलावा अन्य कर्मचारियों तक हो सकता है. यह योजना केंद्र सरकार के कर्मचारियेां के लिए 1 अप्रैल से शुरू हो गई है. इसके तहत सेवा के अंतिम 12 महीनों के औसत मूल वेतन के 50 फीसदी जितनी पेंशन की व्यवस्था की गई है.

OPS और UPS में गारंटीड पेंशन मिलती है. Image Credit: GettyImages

PFRDA यानी पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी और IIM अहमदाबाद की तरफ से गुरुवार को पहला अंतरराष्ट्रीय पेंशन शोध सम्मेलन आयोजित किया. इस सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय वित्त सचिव एम नागराजू ने कहा कि 1 अप्रैल से केंद्रीय कर्मचारियेां के लिए शुरू हुई यूनिफाइड पेंशन स्कीम यानी UPS का विस्तार तमाम दूसरे कर्मचारियों तक किया जा सकता है. एम नागराजू ने गुरुवार को उम्मीद जताई कि UPS को एनपीएस के तहत अन्य हितधारकों के लिए भी लागू किया जा सकता है.

उन्होंने कहा कि एनपीएस देश में एक मजबूत सेवानिवृत्ति बचत तंत्र के रूप में उभरी है, इसके प्रबंधन के तहत बढ़ती संपत्ति और ग्राहक आधार इस योजना में लोगों के विश्वास को दर्शाता है. सरकार ने हाल ही में केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए एनपीएस के तहत यूपीएस की शुरुआत की है, यह योजना 1 अप्रैल से लागू हो गई.

क्यों खास है यूपीएस

नागराजू ने कहा कि यूपीएस एक अनोखी अंशदायी लेकिन परिभाषित योजना है, जो सेवानिवृत्ति से ठीक पहले सेवाकाल के अंतिम 12 महीनों के औसत मूल वेतन की 50 फसदी रकम पेंशन के तौर पर सुनिश्चित करती है. इसके साथ ही DR के तहत महंगाई से राहत भी देती है. उन्होंने कहा, “मुझे विश्वास है कि इस योजना का कार्यान्वयन, देश में अन्य हितधारकों के लिए समान स्तर और मांग को पूरा करने की क्षमता का निर्माण करेगा.” इसके साथ ही बजट घोषणा के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री ने पेंशन उत्पादों के विनियामक समन्वय और विकास के लिए एक मंच स्थापित करने की घोषणा की है.

बढ़ेगा पेंशन का दायर

उन्होंने कहा कि व्यापक स्तर पर पेंशन कवरेज को बढ़ाना सरकार का लक्ष्य है. इसके लिए एक मंच बनाया गया है, जो विशेष रूप से गिग वर्कर्स, अनौपचारिक क्षेत्र के कर्मचारियों और समाज के वंचित वर्गों के लिए पेंशन समावेशन का विस्तार के लिए काम करेगा. खासतौर पेंशन के दायरे को व्यापक बनाने की रणनीतियों की पहचान की जाएगी और वित्तीय स्थिरता, पेंशन लाभों की पर्याप्तता और सभी के लिए सेवानिवृत्ति सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सार्वभौमिक पेंशन प्रणाली की संभावनाओं की खोज की जाएगी. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि तमाम प्रगति के बावजूद भारत में पेंशन बचत अन्य उभरती और ओईसीडी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में कम है, जहां पेंशन परिसंपत्तियां जीडीपी के 80 प्रतिशत से अधिक हैं. जबकि, भारत में यह सिर्फ 17 फीसदी हैं.