7 बड़े शहरों में 15 फीसदी बढ़ी ऑफिस स्पेस लीजिंग, कॉर्पोरेट कंपनियां की तरफ से बढ़ी डिमांड: कॉलियर्स
देश के 7 बड़े शहरों में जनवरी से मार्च 2025 के दौरान ऑफिस स्पेस लीजिंग में 15 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. रियल एस्टेट कंसल्टेंसी फर्म कॉलियर्स की तरफ से जारी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि खासतौर पर कॉर्पोरेट कंपनियेां की तरफ से ऑफिस स्पेस की डिमांड में तेजी आई है.

रियल एस्टेट कंसल्टेंसी फर्म कॉलियर्स इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक इस साल जनवरी से मार्च के दौरान भारत के 7 बड़े शहरों में ऑफिस स्पेस की लीजिंग 15 फीसदी बढ़ गई है. इससे यह पता चलता है कि घरेलू और विदेशी कंपनियों की तरफ से देश में दफ्तर बनाने की दर बढ़ी है. कॉलियर्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस तिमाही में कुल 159 लाख वर्ग फुट ऑफिस स्पेस लीज पर लिया गया, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 138 लाख वर्ग फुट था. इस तरह सालाना आधार पर इसमें 15 फीसदी का इजाफा हुआ है.
चेन्नई शीर्ष पर
रिपोर्ट में दिए गए शहरवार आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि ऑफिस स्पेस लीजिंग के मामले में चेन्नई शीर्ष पर है. यहां लीजिंग में 93 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. पिछले वर्ष चेन्नई में 15 लाख वर्ग फीट की लीजिंग हुई, वहीं इस वर्ष यह बढ़कर 29 लाख वर्ग फीट हो गई. इसके बाद पुणे में लीजिंग 50 फीसदी बढ़कर 12 लाख वर्ग फीट हो गई. दिल्ली-एनसीआर में ऑफिस लीजिंग 32 फीसदी बढ़कर 33 लाख वर्ग फीट हो गई, जबकि मुंबई में 16 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ यह आंकड़ा 22 लाख वर्ग फीट पर पहुंच गया. वहीं, 13 फीसदी बढ़ोतरी के साथ बंगलुरु में यह बढ़कर 45 लाख वर्ग फुट हो गई है.
इन शहरों में आई गिरावट
कॉलियर्स की रिपोर्ट के मुताबिक बड़े शहरों में हैदराबाद और कोलकाता में ऑफिस स्पेस की मांग में गिरावट देखी गई है. हैदराबाद में लीजिंग 41 फीसदी घटकर 17 लाख वर्ग फीट रह गईं, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 29 लाख वर्ग फीट थी. वहीं, कोलकाता में यह गिरावट 50 फीसदी रही, जहां लीजिंग 2 लाख वर्ग फीट से घटकर 1 लाख वर्ग फीटी हो गई.
ग्रेड ए स्पेस की मजबूत मांग
कॉलियर्स इंडिया में ऑफिस सर्विसेज के MD अर्पित मेहरोत्रा ने कहते हैं, प्रमुख बाजारों में ग्रेड ए स्पेस की मजबूत मांग देखी जा रही है, जो कॉर्पोरेट विस्तार, वाणिज्यिक रियल एस्टेट में बढ़ते निवेश और आशाजनक घरेलू विकास संभावनाओं से प्रेरित है. इसके साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि यह मांग आगे भी जारी रहेगी, विशेष रूप से टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग और बीएफएसआई सेक्टर में कंपनियों के विस्तार की योजनाएं ग्रोथ की ड्राइवर बनेंगी.
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