SEBI ने एल्‍गो ट्रेडिंग के नए नियम लागू करने की बढ़ाई डेडलाइन, ये रही वजह

सेबी ने कुछ समय पहले रिटेल निवेशकों को भी एल्‍गो ट्रेडिंग करने की सुविधा देने का ऐलान किया था, अभी तक महज संस्‍थागत निवेशक ही इसका फायदा उठा सकते थे. इसके लिए नए नियम 1 अप्रैल से लागू होने वाले थे, लेकिन सेबी ने इसकी समय सीमा बढ़ा दी है, तो क्‍या है इसकी वजह और कब मिलेगा रिटेल निवेशकों को फायदा जानें पूरी डिटेल.

एल्‍गो ट्रेडिंग के नए नियमों को लागू करने की मिली अतिरिक्‍त मोहलत Image Credit: money9

Algo Trading: अगर आप शेयर बाजार में रुचि रखते हैं और एल्‍गो ट्रेडिंग के बारे में सुनते हैं, तो आपके लिए अहम खबर है. सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने रिटेल निवेशकों के लिए एल्‍गो ट्रेडिंग से जुड़े नए नियमों को लागू करने की डेडलाइन को आगे बढ़ा दिया है. पहले ये नियम 1 अप्रैल, 2025 से लागू होने वाले थे, लेकिन अब इन्हें 1 अगस्त, 2025 से लागू किया जाएगा. ऐसे में ब्रोकर्स और एक्‍सचेंजों को तैयारी के लिए चार महीने का अतिरिक्त समय मिल गया है.

सेबी ने कुछ समय पहले ही रिटेल इंवेस्‍टर्स को भी एल्‍गो ट्रेडिंग करने की छूट दी थी, इसके तहत छोटे निवेशक भी अब इसके जरिए ट्रेड कर सकते हैं. अभी तक ये सुविधा महज संस्‍थागत निवेशकों के लिए ही थी, लेकिन रिटेल निवेशकों को एल्‍गो ट्रेडिंग से जोड़ने के लिए ही बाजार नियामक ने एक्‍सचेंजों और ब्रोकर्स को नए नियम लागू करने को लेकर कुछ बदलाव करने के निर्देश दिए थे.

क्यों लिया गया ये फैसला?

स्टॉक एक्सचेंजों ने SEBI से गुजारिश की थी कि उन्हें इन नियमों को लागू करने के लिए थोड़ा और वक्त चाहिए. ब्रोकर्स इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स फोरम (ISF) के साथ मिलकर वे इन मानकों को अंतिम रूप दे रहे हैं. SEBI ने उनकी बात को ध्‍यान में रखते हुए इसकी समय सीमा बढ़ाने का फैसला लिया है. सेबी का मानना है कि सिस्टम में कोई जल्दबाजी नही होनी चाहिए, जिससे सब कुछ ठीक तरीके से लागू हो सके. इसके लिए स्टॉक एक्सचेंजों को अपने सिस्टम अपडेट करने, नियमों में बदलाव करने और ब्रोकर्स को नए दिशानिर्देशों के मुताबिक तैयार होने को कहा गया है.

क्या है एल्‍गो ट्रेडिंग?

एल्‍गो ट्रेडिंग यानी ऐसी ट्रेडिंग जिसमें कंप्यूटर प्रोग्राम्स ऑर्डर को अपने आप तेजी से एग्जीक्यूट करते हैं. ये तरीका तेजी, सटीकता और कम ट्रांजैक्शन कॉस्ट के लिए मशहूर है. यही वजह है कि रिटेल निवेशकों में इसकी लोकप्रियता बढ़ रही है. लेकिन कई एल्गो डेवलपर्स ट्रेडर्स को ऊंचे रिटर्न का लालच देकर उनका पैसा लगाने की कोशिश करते थे. साथ ही वे रजिस्टर्ड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स के लिए लागू नियमों को भी बायपास करते थे. इसी को नियंत्रित करने के लिए SEBI ने 4 फरवरी, 2025 को इसके लिए नए नियम बनाए थे. इसका मकसद रिटेल निवेशकों की सुरक्षा करना और बाजार में पारदर्शिता लाना है. ये नियम 1 अप्रैल 2025 से लागू होने वाले थे, लेकिन अब इसे आगे बढ़ा दिया गया है.

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नए नियमों में क्या है खास?

SEBI के नए एल्‍गो ट्रेडिंग नियम के तहत ब्रोकर्स को एल्‍गो ट्रेडिंग में प्रिंसिपल की तरह काम करना होगा यानी अहम भूमिका निभानी होगी, जबकि एल्‍गो प्रोवाइडर्स उनके एजेंट की भूमिका निभाएंगे. इसके लिए ब्रोकर्स के API का इस्तेमाल होगा. साथ ही, हर एल्‍गो ऑर्डर को एक खास पहचान नंबर यानी (यूनिक आइडेंटिफायर) के साथ टैग करना जरूरी होगा, जिससे ऑडिट के दौरान उसकी जांच आसानी से हो सके. एल्‍गो प्रोवाइडर्स को भी स्टॉक एक्सचेंजों के साथ रजिस्टर करना होगा. अगर कोई रिटेल निवेशक अपना खुद का एल्‍गोरिदम बनाता है, तो उसे भी एक तय सीमा से ज्यादा ऑर्डर प्रति सेकंड होने पर रजिस्टर कराना होगा.