ट्रंप के टैरिफ फैसले से अमेरिकी बाजार में हड़कंप, Nike, Nvidia, Apple समेत इन शेयरों का बुरा हाल!

ट्रंप का यह टैरिफ फैसले का असर अमेरिकी बाजार सहित एशियाई मार्केट में देखा जा रहा है. इससे अमेरिकी और ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता बढ़ी है. इसका असर अमेरिकी बाजार में भी साफ-साफ देखा गया. बीते कारोबारी दिन अमेरिकी बाजार में भारी गिरावट देखी गई.

Wall Street. Image Credit: Getty Images

Nike, Nvidia, Apple and Tesla share price crashed: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 2 अप्रैल को दुनिया के 180 से अधिक देशों पर टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद अमेरिकी शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली. इस फैसले से अमेरिका और अन्य देशों के बाजारों में उथल-पुथल मच गई. डाउ जोंस 751 अंक यानी 1.8 फीसदी गिर गया, जबकि S&P 500 3 फीसदी और Nasdaq-100 फ्यूचर्स 3.8 फीसदी तक लुढ़क गए. इस फैसले का सबसे ज्यादा असर उन कंपनियों पर पड़ा, जो विदेशों से व्यापार पर निर्भर हैं.

अमेरिका में कंपनियों को बड़ा झटका

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका में इंपोर्ट होने वाले लगभग सभी प्रोडक्ट्स पर कम से कम 10 फीसदी का टैरिफ लगाया जाएगा. इसके साथ ही उन्होंने अलग-अलग देशों के लिए अलग-अलग टैरिफ लगाया. जैसे ही यह आदेश साइन हुआ, बड़ी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली. Nike के शेयर 7 फीसदी और Apple के 6 फीसदी तक गिर गए. Five Below के शेयर 11 फीसदी और Gap के 12 फीसदी तक लुढ़क गए. इसके अलावा आईटी को भी इस फैसले से बड़ा झटका लगा. Nvidia के शेयर 4 फीसदी नीचे आ गए वहीं, टेस्ला के शेयरों में 5 फीसदी तक की गिरावट देखी गई.

टेक और सेमीकंडक्टर कंपनियों पर असर

टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर सेक्टर को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ क्योंकि ताइवान और चीन पर भारी टैरिफ लगने से सप्लाई चेन प्रभावित हुई है.

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ग्लोबल मार्केट भी चपेत में

अमेरिकी बाजार के अलावा, दुनियाभर के शेयर बाजारों में भी गिरावट आई. भारतीय, जापानी और चीनी स्टॉक्स में भी गिरावट देखने को मिली. MSCI इंडिया ETF 2.8 फीसदी गिरा, जापान का EWJ ETF 3.2 फीसदी टूटा और चीन का MCHI ETF 2.4 फीसदी तक फिसल गया.

Ralph Lauren के शेयर 5 फीसदी और Estée Lauder के शेयर 3.5 फीसदी तक लुढ़क गए.

पहले तेजी, फिर बिकवाली

Northlight Asset Management के क्रिस जैकेरेली ने Bloomberg को बताया कि जब प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू हुई तो राष्ट्रपति ने कहा कि टैरिफ 10 फीसदी बेसलाइन से शुरू होंगे, जो बाजार की उम्मीद से बेहतर था. इसलिए फ्यूचर्स में तेजी आई. लेकिन जब उन्होंने अलग-अलग देशों के लिए टैरिफ दरें बतानी शुरू कीं और ये 10 फीसदी से कहीं ज्यादा निकलीं, तब बाजार ने तेजी से प्रतिक्रिया दी और भारी गिरावट आ गई.

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