एक्सप्रेसवे और ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे में क्या है अंतर है, जानें क्या होती है स्पीड लिमिट; कितना लगता है टोल टैक्स

पिछले कुछ समय से एक्सप्रेसवे और ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे की खूब चर्चा हो रही है. फिलहाल, दिल्ली से मुंबई के बीच ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण हो रहा है. लेकिन अक्सर मन में सवाल आता है कि एक्सप्रेसवे और ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे में क्या अंतर है, साथ ही ये हाईवे से कैसे अलग होते हैं.

एक्सप्रेसवे VS ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे Image Credit: money9live.com

Expressway VS Greenfield Expressway: भारत में सड़कों का जाल तेजी से बिछाया जा रहा है. इस साल ही 10,000 किलोमीटर नेशनल हाइवे का निर्माण होने वाला है. इसके अलावा, हाई-स्पीड कॉरिडोर की कुल लंबाई 5,800 किलोमीटर तक पहुंचाने का लक्ष्य है. अक्सर एक्सप्रेसवे, ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे और नेशनल हाइवे बनने की खबरें आती रहती हैं. उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे के मामले में शीर्ष पर है, जहां कई एक्सप्रेसवे का निर्माण हो रहा है. लेकिन एक सवाल जो अक्सर लोगों को भ्रमित करता है, वह यह है कि एक्सप्रेसवे, ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे और हाईवे में क्या अंतर होता है. तो आइए, आज आपको इनके बारे में विस्तार से बताते हैं ताकि आपका भ्रम हमेशा के लिए दूर हो जाए.

क्या होता है एक्सप्रेसवे

हम ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को समझेंगे, लेकिन उससे पहले यह जानना जरूरी है कि एक्सप्रेसवे क्या होता है. एक्सप्रेसवे को आप हाईवे का अगला संस्करण (नेक्स्ट वर्जन) समझ सकते हैं. आमतौर पर हाईवे पर रेड लाइट या चौराहे होते हैं, लेकिन एक्सप्रेसवे पर ऐसा नहीं होता.

एक्सप्रेसवे यानी एक्सेस कंट्रोल हाईवे—इस पर एक बार चढ़ने के बाद उतरने के लिए सीमित विकल्प होते हैं, आप कहीं भी इससे उतर नहीं सकते. यह पूरी तरह से एक्सेस कंट्रोल होता है. एक्सप्रेसवे, सामान्य सड़कों की तुलना में काफी चौड़ा होता है और यहां अधिकतम स्पीड 100-120 किलोमीटर प्रति घंटा होती है.

ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे कैसे अलग है

ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, इसे ग्रीन कॉरिडोर भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है कि यह ऐसी जगह पर बनाया जाता है जहां पहले कोई सड़क नहीं थी. इसके निर्माण के लिए किसी बिल्डिंग या घर को तोड़ने की बहुत कम आवश्यकता नहीं पड़ती, जिससे भूमि अधिग्रहण आसान हो जाता है.

यह आमतौर पर शहर से थोड़ा दूर बनाया जाता है, जिससे यातायात की भीड़ भी कम होती है. इसके अलावा, यह सीधे मार्गों पर केंद्रित होता है, जिससे घुमाव और मोड़ कम होते हैं. ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के कई उदाहरण मौजूद हैं, जिनमें दिल्ली-वडोदरा एक्सप्रेसवे और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे शामिल हैं.

यह भी पढ़ें: यमुना एक्सप्रेसवे और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे होंगे लिंक, इन लोगों को सीधा फायदा; 270 करोड़ में बनेगी रोड

हाइवे और एक्सप्रेसवे में क्या अंतर है

हाइवे आमतौर पर शहरों के बीच से गुजरते हैं और इनमें कई रेड लाइट और चौराहे होते हैं, जबकि एक्सप्रेसवे पर ऐसा नहीं होता. हाईवे और एक्सप्रेसवे की स्पीड लिमिट भी अलग-अलग होती है. हाईवे पर आप कहीं भी चढ़ या उतर सकते हैं, लेकिन एक्सप्रेसवे पर चढ़ने और उतरने के लिए समर्पित (डेडिकेटेड) पॉइंट होते हैं.

कितना लगता है टोल टैक्स

वाहन का प्रकारप्रति किमी शुल्क की आधार दर (रुपये में)एक्सप्रेसवे के लिए शुल्क (1.25 गुना)दो लेन वाले राजमार्ग के लिए शुल्क (60%)बाईपास के लिए शुल्क (1.5 गुना)60 मीटर से अधिक स्ट्रक्चर के लिए शुल्क (10x लंबाई)
कार, जीप, वैन या हल्का मोटर वाहन0.650.81250.390.9756.5 (प्रति 60 मीटर स्ट्रक्चर)
हल्का वाणिज्यिक वाहन, हल्का माल वाहन या मिनी बस1.051.31250.631.57510.5 (प्रति 60 मीटर स्ट्रक्चर)
बस या ट्रक (दो धुरा)2.202.751.323.3022.0 (प्रति 60 मीटर स्ट्रक्चर)
Three-axle वाले वाणिज्यिक वाहन2.403.001.443.6024.0 (प्रति 60 मीटर स्ट्रक्चर)
भारी निर्माण मशीनरी (HCM) या अर्थ मूविंग इक्विपमेंट (EME) या मल्टी एक्सल वाहन (MAV)3.454.31252.075.17534.5 (प्रति 60 मीटर स्ट्रक्चर)
बड़े आकार के वाहन 4.205.252.526.3042.0 (प्रति 60 मीटर स्ट्रक्चर)
(सोर्स-भारत सरकार )