मार्च में हुई रिकॉर्ड UPI Transactions, 13.59% की दिखी बढ़त; टूटे रिकॉर्ड!

आज भारत में कैश ट्रांजेक्शन की तुलना में डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. UPI (Unified Payments Interface) जैसी सुविधाओं ने लेन-देन को न केवल आसान बनाया है, बल्कि लोगों को पैसे खोने के डर से भी मुक्त कर दिया है. पहले जहां कैश रखना जरूरी था, अब लोग स्मार्टफोन और यूपीआई आईडी के जरिए बड़ी से बड़ी पेमेंट्स कर रहे हैं.

ट्यूशन फीस, बाजार की खरीदारी, पेट्रोल पंप पेमेंट, रेस्टोरेंट बिल, यहां तक कि सब्जी और फल विक्रेता भी अब QR कोड और यूपीआई के माध्यम से भुगतान स्वीकार कर रहे हैं. डिजिटल पेमेंट से कैश की झंझट खत्म हो गई है और हर ट्रांजेक्शन का रिकॉर्ड भी उपलब्ध रहता है.

सरकार द्वारा डिजिटल इंडिया अभियान को बढ़ावा देने और UPI पेमेंट्स को इंटरनेशनल लेवल तक ले जाने से भारत की कैशलेस इकोनॉमी को मजबूती मिल रही है. इससे धोखाधड़ी कम हुई है और ट्रांजेक्शन में पारदर्शिता आई है. आने वाले समय में नकद भुगतान की जरूरत और भी कम हो सकती है, जिससे डिजिटल ट्रांजेक्शन ही मुख्य पेमेंट माध्यम बन जाएगा.