Trump Tariff: ‘लिबरेशन डे’ ऐलान दोधारी तलवार, जानें कैसे ट्रंप को उल्टा पड़ सकता है यह दांव
अमेरिकी राष्ट्रपति राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का “लाइबरेशन डे” आ गया है. हालांकि, तमाम जानकारों का मानना है कि ट्रंप का यह दांव बहुत से अमेरिकी लोगों के लिए यह उल्टा पड़ सकता है. ट्रंप खुद भी यह बात स्वीकार चुके हैं, कि टैरिफ वॉर दोधारी तलवार है. यह जानते हुए वे इन्हें लागू करने का जोखिम उठा रहे हैं.
Trump Tariff: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले तीन महीनों से जिन टैरिफ की वजह से पूरी दुनिया को बेचैन कर रखा है, उनके ऐलान का दिन आ गया है. ट्रंप प्रशासन ने महीनों से टैरिफ की अपनी योजना को बेहद गुप्त रखा है. दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था, छोटे कारोबार और यहां तक की आम लोगों पर भी इसका असर हो सकता है. हालांकि, अमेरिकी लोग भी इस टैरिफ युद्ध की आग की तपिश से अछूते नहीं रहने वाले हैं. कुछ जानकारों की मानें, तो असल में आम अमेरिकी उपभोक्ता ही सबसे पहले ट्रंप के टैरिफ की दोधारी तलवार की धार पर नंगे पैर चलने वाला है.
क्या हैं ट्रंप के चार मकसद?
जवाबी टैरिफ को लेकर ट्रंप के चार मकसद हैं. पहला, अमेरिका में फेंटेनाइल और अवैध अप्रवास के प्रवाह को रोकना. असल में यही मुख्य कारण है, जिसकी वजह से ट्रंप ने चीन पर 20% टैरिफ लगाया और मैक्सिकन व कनाडाई आयात पर 25% टैरिफ लगाने की धमकी दी है. इसके बाद दूसरा मकसद है अमेरिका को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना. ट्रंप ने अमेरिका को दशकों पहले जैसा विनिर्माण केंद्र बनाने के लिए जोरदार अभियान चलाया है. ट्रंंप बार-बार कंपनियों को याद दिला रहे हैं कि अगर वे अमेरिका में उत्पाद बनाती हैं, तो उनको कोई टैरिफ नहीं देना होगा. इसके बाद तीसरा मकसद है कर्ज चुकाते हुए टैक्स घटाना. ट्रंप चाहते हैं कि अमेरिकी लोगों से टैक्स से जो रकम मिलती है, उसकी भरपाई टैरिफ से की जाए. इसके अलावा किसी स्पष्ट योजना क बिना वे टैरिफ से देश का कर्ज कम करने का दावा भी करते हैं. ट्रंप का चौथ मकसद है, विश्व व्यापार में निष्पक्षता लाना. हालांकि, मौजूदा टैरिफ विश्व व्यापार संगठन के नियमों के मुताबिक ही लगाए गए हैं, जिसका मुख्यालय और मोटे तौर पर पूरा तंत्र अमेरिका के इर्दगिर्द बुना है. हालांकि, ट्रंप कहते हैं कि मौजूदा टैरिफ व्यवस्था धोखा है. इससे अमेरिका को नुकसान हो रहा है.
क्या अमेरिकी लोगों को फायदा होगा?
ट्रंप और उनके प्रशासन ने अब तक ऐसी कोई विस्तृत योजना पेश नहीं की है, जिससे यह पता चल पाए कि टैरिफ लगाए जाने से अमेरिकी लोगों को लाभ होगा. ट्रंप लगातार यह दावा कर रहे हैं कि टैरिफ लगाने से अमेरिका में रोजगार बढ़ेगा. अमेरिकी लोगों पर टैक्स घटेगा और अमेरिका कर्ज मुक्त हो जाएगा. लेकिन, इसकी कोई ठोस योजना पेश नहीं की है. ऐसे में यह कह पाना मुश्किल है कि टैरिफ लगाए जाने से अमेरिकी लोगों को कोई फायदा मिलेगा.
क्यों भरोसा कर रहे अमेरिकी लोग?
कुछ दशक पहले तक अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरर हुआ करता था. अमेरिकी शहर बोस्टन, शिकागो, डेट्रॉइट मैन्युफैक्चरिंग के लिए मशहूर थे. लेकिन, अब इन शहरों को भूतहा कहा जाता है, क्योंकि यहां पर हजारों फैक्टरियां वीरान पड़ी हैं. ट्रंप अमेरिकी लोगों को उस दौर को याद दिलाते हैं. यही वजह है कि उनके समर्थक इस बात पर भरोसा करते हैं कि टैरिफ बढ़ाने से रोजगार बढ़ सकता है.
टैरिफ से कैसे बढ़ेगा रोजगार?
आमतौर पर जब किसी उत्पाद के आयात पर टैरिफ बढ़ता है, तो वह उत्पाद महंगा हो जाता है. उस स्थिति में उस उत्पाद का स्थानीय उत्पादन बढ़ता है. हालांकि, अमेरिका के मामले में यह सच साबित हो जरूरी नहीं है. क्योंकि, यहां इस बात को समझना जरूरी है कि अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग कम क्यों हुई. असल में अमेरिका में लेबर कॉस्ट बढ़ना सबसे बड़ा कारण था कि अमेरिकी कंपनियों ने मैन्युफैक्चरिंग को आउटसोर्स किया. चीन, भारत, ताइवान, इंडोनेशिया, जापान, दक्षिण कोरिया जैसे देशों के लोग अमेरिकी लोगों की तुलना में काफी गरीब थे, इन देशों की प्रति व्यक्ति आय अमेरिका की तुलना में कम थी, इसके चलते इन देशों में लेबर कॉस्ट कम रहती है. इसी वजह से अमेरिकी कंपनियां यहां मैन्युफैक्चरिंग कराती हैं.
क्या अमेरिका में उपलब्ध होगी सस्ती लेबर?
लॉन्ग टर्म में ट्रंप के टैरिफ प्लान की कामयाबी इस बात पर ही निर्भर करती है कि कंपनियों को अमेरिका में सस्ता श्रम मिले. अगर ऐसा नहीं होता है, तो अमेरिकी लोग महंगाई के चक्र में फंस जाएंगे, जबकि फिलहाल वे दुनिया के दूसरे देशों की तुलना में महंगाई के मोर्चे पर बहुत ही स्थिर और सुरक्षित स्थिति में है. इसका अंदाजा अमेरिकी केंद्रीय बैंक की नीतिगत दरों से लागया जा सकता है, तो फिलहाल 4 फीसदी के दायरे में हैं. जबकि, महंगाई दर 2 फीसदी के दायरे में है.
कैसे उल्टा पड़ सकता है दांव?
स्टील, एलुमिनियम, ऑटोमोबाइल, फार्मा कोई भी सेक्टर हो, इनके लिए स्किल्ड और व्यापक लेबर फोर्स की जरूरत होती है. अमेरिका में कई दशकों से ये काम बंद हैं. ऐसे में इन कामों को करने के लिए जरूरी लेबर फोर्स अमेरिका में उपलब्ध है या नहीं यह सबसे बड़ा सवाल है. इसके अलावा टैरिफ भले ही रातों रात लागू हो जाएगा, लेकिन अमेरिका में इन वस्तुओं का उत्पादन रातों रात नहीं बढ़ेगा, ऐसे में अमेरिकी लोगों को ज्यादा टैरिफ कॉस्ट के साथ इन वस्तुओं को खरीदना होगा. इस तरह भले ही ट्रंप उनका इनकम टैक्स घटा दें, लेकिन असल में उनका खर्च बढ़ जाएगा, इसके अलावा अमेरिकी लोग अगर एक तय समय में टैरिफ वाली वस्तुओं का घरेलू उत्पादन बढ़ाने में नाकाम रहे, तो निर्यातक देश इन वस्तुओं को अमेरिका के खिलाफ भी इस्तेमाल कर सकते हैं. बहरहाल, टैरिफ का क्या असर होने वाला है, यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि ट्रंप प्रशासन ने इसे लागू करने की क्या योजना बनाई है.
गोल्डमैन सैक्स ने जताई चिंता
अर्थशास्त्रियों ने टैरिफ के आर्थिक प्रभावों को लेकर चिंताएं व्यक्त की हैं. गोल्डमैन सैक्स के विश्लेषकों ने भी पिछले सप्ताह एक नोट में कहा कि ट्रंप की वित्तीय नीतियों द्वारा संचालित आर्थिक वृद्धि उनके विशाल टैरिफ प्लान से हुए नुकसान की भरपाई नहीं कर पाएगी.