JP Morgan ने दी बड़ी चेतावनी, कहा- ट्रंप की टैरिफ नीति लागू हुई तो अमेरिका होगा मंदी की जद में

अगर ट्रंप की नीतियां लागू होती हैं तो अमेरिका न सिर्फ आर्थिक रूप से कमजोर पड़ेगा, बल्कि वैश्विक व्यापार संबंधों पर भी गंभीर असर पड़ सकता है. एक बड़ी अमेरिकी बैंक की ताजा रिपोर्ट ने अमेरिका की आर्थिक दिशा को लेकर चिंता जताई है. विशेषज्ञों ने 2025 के लिए कुछ ऐसे अनुमान दिए हैं जो वैश्विक बाजारों में खलबली मचा सकते हैं. पूरी जानकारी पढ़ें...

अमेरिका पर डोनाल्ड ट्रंप के फैसले का असर Image Credit: Freepik

अमेरिका की अर्थव्यवस्था को लेकर पहली बड़ी चेतावनी वॉल स्ट्रीट के दिग्गज बैंक JP Morgan ने दी है. बैंक का कहना है कि अगर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ नीति लागू होती है, तो साल 2025 में अमेरिका मंदी में प्रवेश कर जाएगा. यह पहली बार है जब किसी प्रमुख अमेरिकी बैंक ने सार्वजनिक रूप से ट्रंप की व्यापार नीति को आर्थिक खतरे के रूप में चिन्हित किया है.

GDP में गिरावट तय मानी जा रही है

JP Morgan के चीफ US इकोनॉमिस्ट माइकल फेरोली ने कहा है कि अब बैंक को उम्मीद है कि अमेरिका की GDP में गिरावट होगी. उन्होंने 2025 की आखिरी दो तिमाहियों के लिए अनुमान लगाया है कि Q3 में GDP 1 फीसदी और Q4 में 0.5 फीसदी सिकुड़ेगी. पहले जहां अमेरिकी जीडीपी 1.3 फीसदी की ग्रोथ का अनुमान था, अब उसे बदलकर -0.3 फीसदी कर दिया गया है.

इस पूर्वानुमान के बाद अमेरिकी शेयर बाजार में जोरदार गिरावट दर्ज की गई. Dow Jones 2,231 अंक गिरा, जो मार्च 2020 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट है. S&P 500 में 6 फीसदी और Nasdaq में 5.8 फीसदी की गिरावट देखी गई जिससे बाजार ने Bear Zone में एंट्री कर ली. दो दिनों में अमेरिकी इक्विटी मार्केट का 5.4 ट्रिलियन डॉलर का मूल्य स्वाहा हो गया.

यह भी पढ़ें: बाबा वेंगा पहले ही कर चुकी हैं आर्थिक तबाही की भविष्यवाणी, क्या उसी रास्ते जा रहे हैं ट्रंप, 2025 में अब तक इतनी हुई सच

बेरोजगारी और महंगाई की दोहरी मार

ट्रंप की टैरिफ नीति के जवाब में चीन ने अमेरिका पर 34 फीसदी रिटैलिएटरी टैक्स लगा दिया है. अन्य देशों ने भी संकेत दिया है कि वे अपने व्यापार समझौतों की समीक्षा कर सकते हैं या जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं.

JP Morgan ने चेतावनी दी है कि अगर यह मंदी आती है तो बेरोजगारी दर 5.3 फीसदी तक पहुंच सकती है, जो मार्च में 4.2 फीसदी थी. साथ ही, महंगाई का नया दौर शुरू हो सकता है जो लोगों की बचत और खर्च करने की क्षमता पर सीधा असर डालेगा.