क्या है अमेरिका का गोल्ड कार्ड वीजा, कितनी लगेगी फीस और ग्रीन कार्ड से कितना अलग
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नया "$5 मिलियन गोल्ड कार्ड" वीजा के बारे में घोषणा की है. यह वीजा अमीर लोगों को अमेरिका में स्थायी निवास की अनुमति देगा, लेकिन इसकी कीमत लगभग 43.5 करोड़ रुपये है. ये ग्रीन कार्ड से कैसे अलग है, जिसके पास करोड़ों रुपये नहीं उसे कैसे मिलेगा वीजा, यहां जाने सबकुछ...
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What is Gold Card Visa: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नया “$5 मिलियन गोल्ड कार्ड” वीजा लाने का प्रस्ताव दिया है, जो अमेरिका के EB-5 इंवेस्टर प्रोग्राम की जगह ले सकता है. 5 मिलियन डॉलर लगभग 43.55 करोड़ रुपये होते हैं. लेकिन ट्रंप के इस बयान ने भारतीय नागरिकों के बीच चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि 10 लाख से ज्यादा भारतीय ग्रीन कार्ड के लिए इंतजार कर रहे हैं. कुछ ऐसे भी हैं जो 50 साल से इंतजार कर रहे हैं. अगर ट्रंप इसे लागू कर देते हैं, तो अमेरिका के इमिग्रेशन प्रोसेस में बड़ा बदलाव आ सकता है.
गोल्ड कार्ड वीजा क्या है और यह ग्रीन कार्ड से अलग है?
गोल्ड कार्ड वीजा, ग्रीन कार्ड की सुविधाएं देगा और अमेरिकी नागरिकता का रास्ता खोलेगा, लेकिन इसकी कीमत $5 मिलियन है जो करीब 43.5 करोड़ रुपये है. इसका मतलब है कि अगर किसी के पास इतनी रकम है, तभी वो अमेरिका में स्थायी निवास ले सकता है.
ऐसी व्यवस्था अमेरिका में पहले भी थी कि भारी रकम देकर वहां का निवासी बना जा सकता है. वह वीजा है EB-5 इंवेस्टर वीजा. हालांकि दोनों में फर्क है.
- EB-5 वीजा के तहत $800,000-$1.05 मिलियन (करीब 8.7 करोड़) निवेश करके अमेरिका में एक ऐसा बिजनेस शुरू करना होता है, जो कम से कम 10 अमेरिकियों को नौकरी दे.
- लेकिन ट्रंप के इस गोल्ड कार्ड में फिलहाल ऐसी कोई शर्त नहीं है. इसमें सिर्फ पैसा देना होगा.
हालांकि गोल्ड कार्ड को लेकर क्या नियम कायदे होंगे इस बारे में नहीं बताया गया है.
भारतीय नागरिकों पर क्या असर होगा?
भारत से हर साल हजारों लोग ग्रीन कार्ड के लिए अप्लाई करते हैं, लेकिन बैकलॉग के कारण कुछ को दशकों तक इंतजार करना पड़ जाता है. ऐसे में गोल्ड कार्ड से:
- अमीर भारतीयों के लिए तेजी से रास्ता खुल सकता है, अगर वे इतनी बड़ी रकम चुका सकें.
- मिडिल क्लास निवेशकों के लिए रास्ता बंद हो सकता है, जो EB-5 वीजा का सहारा लेते थे.
- अमीर व्यापारियों और इंडस्ट्रलिस्ट को प्राथमिकता मिलेगी, जबकि स्किल्ड प्रोफेशनल को लंबा इंतजार करना पड़ेगा.
कुल मिलाकर अमेरिका के दरवाजे अब अमीर लोगों के लिए आसानी से खुल सकेंगे.
क्या गोल्ड कार्ड, EB-5 वीजा की जगह लेगा?
हां, अमेरिका के कॉमर्स सेक्रेटरी हावर्ड लुटनिक ने कहा है कि अगले दो हफ्तों में EB-5 वीजा बंद हो जाएगा और उसकी जगह गोल्ड कार्ड ले लेगा. ट्रंप ने EB-5 प्रोग्राम को “फ्रॉड से भरा हुआ” बताया है.
क्या H-1B, EB-2 या EB-3 वीजा वाले भारतीय गोल्ड कार्ड ले सकते हैं?
हां, गोल्ड कार्ड वीजा कोई भी ले सकता है, शर्त यही है कि आपको करोड़ों रुपये देने होंगे यानी $5 मिलियन. ट्रंप का कहना है कि “अमीर लोग इस पैसे से टैलेंटेड लोगों को अमेरिका लाने में मदद करेंगे.” फिलहाल इसका ये मतलब निकाला जा रहा है कि कंपनियां अपने स्किल्ड कर्मचारियों को स्पॉन्सर कर सकेंगी.
गोल्ड कार्ड नहीं तो भारतीयों के पास क्या ऑप्शन हैं?
जाहिर सी बात है कि गोल्ड कार्ड के लिए हर किसी के पास इतने पैसे नहीं है. ऐसी स्थिति में आम लोग अभी भी H-1B, EB-1, EB-2, या EB-3 वीजा के जरिए अमेरिका में बसने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन प्रोसेस लंबा और मुश्किल रहेगा.
EB-5 के लिए आवेदन कर रहे भारतीयों पर क्या असर होगा?
गोल्ड कार्ड वीजा EB-5 की जगह लेने जा रहा है. ऐसे में जो 1 मिलियन डॉलर देकर EB-5 लेने का प्लान कर रहे थे उन्हें अब 5 मिलियन डॉलर देकर गोल्ड कार्ड लेना होगा, जो कई लोगों के लिए मुश्किल हो सकता है. पहले EB-5 इंवेस्टर्स बैंक लोन या फंडिंग के जरिए पैसा जमा कर सकते थे, लेकिन गोल्ड कार्ड में सीधा कैश पेमेंट जरूरी होगा.
क्या EB-5 की तरह गोल्ड कार्ड की कोई लिमिट होगी?
नहीं. ट्रंप ने कहा है कि वे 10 लाख से 1 करोड़ तक गोल्ड कार्ड बेच सकते हैं. EB-5 की तरह कोई संख्या सीमा नहीं होगी, क्योंकि यह पूरी तरह से अमेरिका के लिए “रेवेन्यू स्कीम” की तरह काम करेगा.
क्या ट्रंप बिना संसद (कांग्रेस) की मंजूरी के लागू कर सकते हैं?
ट्रंप का कहना है कि उन्हें कांग्रेस की मंजूरी की जरूरत नहीं है, लेकिन कानूनी विशेषज्ञ इससे सहमत नहीं हैं. अगर इसके खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए या राजनीतिक विरोध हुआ, तो इसे लागू करने में देरी हो सकती है.
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